झारखंड के 76% डाकघरों में एक महीने से पसरा सन्नाटा, हज़ारों ऑफिस में पूरे महीने स्पीड पोस्ट की बुकिंग ज़ीरो

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News India Live, Digital Desk : क्या आपको वो जमाना याद है जब डाकिया साइकिल की घंटी बजाता था, तो पूरा मोहल्ला दरवाजे पर आ जाता था? चिट्ठी भेजना और उसका जवाब आने का इंतजार करना भी किसी उत्सव से कम नहीं होता था। लेकिन वक्त के साथ तकनीक ने हमारे जीने का तरीका बदल दिया है। और इसका सबसे बड़ा असर हमारी पुरानी 'डाक सेवा' पर पड़ा है।

झारखंड से जो ताजे आंकड़े सामने आए हैं, वो न सिर्फ चौंकाने वाले हैं बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर करते हैं कि क्या हम 'खत लिखने की कला' को पूरी तरह भूल चुके हैं?

हैरान करने वाली हकीकत

हाल ही में झारखंड डाक परिमंडल की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने सबको सन्न कर दिया है। रिपोर्ट बताती है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में अब लोग स्पीड पोस्ट (Speed Post) करने के लिए डाकघर जा ही नहीं रहे।

आंकड़ों की बात करें तो 1 से 23 नवंबर के बीच, झारखंड के करीब 76% ग्रामीण डाकघरों (Branch Post Offices) में स्पीड पोस्ट की बुकिंग का आंकड़ा शून्य (Zero) रहा।

जी हाँ, आपने सही पढ़ा—"जीरो"।
राज्य में कुल 4,109 ग्रामीण शाखाएं हैं, जिनमें से 3,149 डाकघर ऐसे थे जहाँ 23 दिनों में एक भी ग्राहक स्पीड पोस्ट करने नहीं पहुंचा। यानी कर्मचारी रोज दफ्तर खोलते रहे, लेकिन काम के नाम पर सन्नाटा रहा।

WhatsApp ने ले ली डाकिए की जगह?

अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा हुआ क्यों? इसका सीधा जवाब है— स्मार्टफोन और इंटरनेट।
आजकल किसी को बधाई देनी हो या दुख जताना हो, बस WhatsApp पर एक मैसेज टाइप करो और सेकंड्स में काम हो गया। फोटो, वीडियो और डॉक्यूमेंट्स भी ईमेल से चले जाते हैं। तो फिर 4-5 दिन का इंतज़ार कौन करे? यही वजह है कि डाक विभाग की पारंपरिक सेवाएं अब लोगों की पहली पसंद नहीं रहीं।

पलामू का हाल सबसे बुरा, रांची की साख बची

अगर इलाकों की बात करें, तो पलामू प्रमंडल में स्थिति सबसे खराब है। वहां करीब 91% डाकघरों में स्पीड पोस्ट की बुकिंग शून्य रही। मतलब वहां के लोग शायद पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं।

वहीं, राजधानी रांची की हालत थोड़ी बेहतर है, शायद इसलिए क्योंकि यहाँ सरकारी कामकाज और छात्रों की वजह से थोड़ी हलचल रहती है। फिर भी, यहाँ के भी 35% ग्रामीण डाकघरों में सन्नाटा ही दिखा। इसके अलावा सिंहभूम और संथाल परगना जैसे इलाकों में भी 70-80% डाकघर खाली ही रहे।

डाक विभाग की बदलती भूमिका

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पोस्ट ऑफिस बंद हो जाएंगे। आजकल डाक विभाग ने खुद को बदला है। लोग अब चिट्ठी भेजने के बजाय आधार कार्ड अपडेट, बैंकिंग, या बीमा करवाने के लिए पोस्ट ऑफिस जाते हैं। "डाक" कम हो गई है, लेकिन डाकघर की भूमिका बदल गई है।