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April 10 2026 02:00 pm

ईरान की धरती में दफन है 450 किलो परमाणु बारूद, क्या जो बाइडन छीन पाएंगे तेहरान से उसका सबसे घातक हथियार?

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News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है। ईरान की धरती के नीचे भारी मात्रा में यूरेनियम का भंडार छिपा है, जिसे लेकर अमेरिका और इजरायल की बेचैनी चरम पर पहुंच गई है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने लगभग 450 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को जमीन के नीचे सुरक्षित बंकरों में छिपा रखा है। यह मात्रा इतनी अधिक है कि इससे कई परमाणु बम आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका इस 'परमाणु खजाने' को ईरान से वापस लेने या नष्ट करने में कामयाब हो पाएगा?

परमाणु बंकरों में कैद तबाही का सामान

ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सुरक्षित रखने के लिए पहाड़ों और जमीन के सैकड़ों फीट नीचे अभेद्य बंकर बनाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नतांज और फोर्डो जैसे परमाणु केंद्रों के भीतर 450 किलोग्राम यूरेनियम का यह भंडार मौजूद है। यह यूरेनियम 60 प्रतिशत तक संवर्धित बताया जा रहा है, जो कि हथियार बनाने के स्तर (Weapons-grade) के बेहद करीब है। अमेरिका के रक्षा रणनीतिकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये ठिकाने इतने गहरे हैं कि उन पर पारंपरिक हवाई हमलों का असर होना नामुमकिन है।

बाइडन प्रशासन के सामने 'करो या मरो' की स्थिति

व्हाइट हाउस इस समय भारी दबाव में है। एक तरफ ईरान तेजी से परमाणु शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका पर इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस कोशिश में जुटी हैं कि किसी तरह इस यूरेनियम को 'रिट्रिव' (वापस) किया जा सके या कूटनीतिक समझौतों के जरिए इसे देश से बाहर भेजा जाए। हालांकि, ईरान के अड़ियल रुख ने इन संभावनाओं पर पानी फेर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए यह चुनावी साल में सबसे बड़ी विदेश नीति की परीक्षा बन गई है।

क्या सैन्य ऑपरेशन है आखिरी रास्ता?

रक्षा जानकारों की मानें तो इस 450 किलो यूरेनियम को निष्क्रिय करने के लिए अमेरिका के पास 'बंकर बस्टर' बमों का विकल्प है, लेकिन यह ऑपरेशन पूरे क्षेत्र को महाविनाशकारी युद्ध में झोंक सकता है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता के साथ समझौता नहीं करेगा। यदि अमेरिका इस परमाणु भंडार को छीनने की कोशिश करता है, तो ईरान खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भीषण पलटवार कर सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत से समाधान निकलेगा या फिर बारूद के ढेर पर बैठा मिडिल ईस्ट धधक उठेगा।