दिल्ली में सजेगा दुनिया का महामंच ,जब एक छत के नीचे आएंगे राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर
News India Live, Digital Desk : आज की तेजी से बदलती दुनिया में भारत अपनी छाप हर तरफ छोड़ रहा है। इसी सिलसिले में एक बहुत बड़ी खबर आई है लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह एलान किया है कि भारत इस बार 28वें राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (CSPOC) की मेज़बानी करने जा रहा है।
आखिर ये आयोजन है क्या और इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
इसे आप ऐसे समझिये कि राष्ट्रमंडल (Commonwealth) उन देशों का समूह है जिनके बीच गहरी ऐतिहासिक जड़ें जुड़ी हैं। अब कल्पना कीजिए कि इन देशों की 'पार्लियामेंट' चलाने वाले लोग यानी स्पीकर्स और अधिकारी एक साथ बैठें, तो वहां सिर्फ नियम-कानूनों की बात नहीं होती, बल्कि भविष्य के लोकतंत्र की दिशा तय होती है।
ओम बिरला ने साफ़ कहा है कि यह आयोजन 14 से 16 जनवरी 2026 के बीच होगा। यह महज़ एक मीटिंग नहीं है, बल्कि दुनिया को यह दिखाने का मौका है कि भारत, जिसे हम 'लोकतंत्र की जननी' कहते हैं, वहां लोकतांत्रिक मूल्य कितने मज़बूत हैं।
किन मुद्दों पर होगी बात?
जब दुनिया भर की संसदें एक ही सुर में बोलेंगी, तो ज़ाहिर है कि मुद्दे भी बड़े होंगे:
- वैश्विक चुनौतियाँ: आज के समय में क्लाइमेट चेंज से लेकर युद्ध के माहौल तक, कई ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें किसी देश का नेता अकेले हल नहीं कर सकता। वहां बातचीत के जरिए आम सहमति बनाने की कोशिश होगी।
- आधुनिक संसद और तकनीक: नई टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैसे जनता की आवाज़ उठाने में मदद कर सकते हैं, इस पर विशेष चर्चा होगी।
- पारदर्शिता: जनता को अपनी सरकार के करीब लाने और पारदर्शिता बढ़ाने के तौर-तरीकों को साझा किया जाएगा।
भारत को क्या मिलेगा?
जब इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की मेज़बानी दिल्ली करता है, तो भारत का कद पूरी दुनिया की नज़रों में ऊँचा होता है। ओम बिरला के इस नेतृत्व में यह तय किया जा रहा है कि भारतीय संसदीय परंपरा को दुनिया के हर कोने तक पहुँचाया जाए। इससे हमारे युवाओं और प्रतिनिधियों को वैश्विक डिप्लोमेसी को समझने का बेहतरीन मौका मिलेगा।