करोड़ों दिलों का थलापति अब कानून के घेरे में, क्या करुर हादसे के घाव बदल देंगे विजय के भविष्य का फैसला?

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News India Live, Digital Desk: दक्षिण भारत के मशहूर अभिनेता जोसेफ विजय (थलापति विजय) इन दिनों अपनी लाइफ की सबसे कड़वी हकीकत से गुज़र रहे हैं। पर्दे पर बुराई को हराने वाले विजय के सामने अब कानून की पेचीदगियां और 41 परिवारों का वो दर्द है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। सोमवार को दिल्ली में CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के मुख्यालय में घंटों तक चली पूछताछ महज़ एक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक ऐसी जिम्मेदारी की शुरुआत थी जिसका जवाब देना शायद विजय के लिए आसान नहीं होगा।

वो खौफनाक रात और करुर का मंजर
यह पूरा मामला उस वक्त का है जब करुर में विजय की नई राजनीतिक पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) का पहला बड़ा जलसा आयोजित किया गया था। जहाँ लाखों की भीड़ विजय की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ी थी, वहां एक ऐसी भगदड़ मची कि सब कुछ खत्म हो गया। इस हादसे ने 41 बेकसूर लोगों की जान ले ली और सैकड़ों घरों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया।

SC का दखल और दिल्ली की "गर्म हवा"
जब राज्य पुलिस की जांच से पीड़ित परिवारों को संतोष नहीं मिला, तो सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया और केस की जांच CBI को सौंप दी। सोमवार सुबह विजय चेन्नई से अपनी चार्टर्ड फ्लाइट के ज़रिए दिल्ली पहुंचे और वहां सीधे सीबीआई दफ्तर गए।

सूत्रों के मुताबिक, वहां अधिकारियों ने विजय से उन 7 घंटों के सस्पेंस के बारे में पूछा, जो हादसे के पहले बीत रहे थे।

  • सवाल था कि रैलियों के लिए सुरक्षा और भीड़ का प्रबंधन आखिर कैसे किया गया?
  • पार्टी की ओर से आयोजक क्या वास्तव में इतने बड़े जनसैलाब को संभालने के लिए तैयार थे?
  • सबसे दुखद पहलू यह है कि इस हादसे में जान गँवाने वाले वो लोग थे जो सिर्फ़ विजय से प्यार करते थे।

भावनात्मक दबाव और फैंस का डर
विजय के प्रशंसकों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। दिल्ली के दफ्तर के बाहर सन्नाटा तो था, लेकिन सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कोई उनके समर्थन में खड़ा है, तो कोई पूछ रहा है कि आखिर इतने लोगों की जान का गुनहगार कौन है? राजनीति में विजय ने अभी कदम रखा ही है कि उन्हें अपनी छवि को पाक-साफ़ साबित करने की इस बड़ी अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ रहा है।

आगे क्या होगा?
जल्द ही तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सीबीआई की यह लंबी पूछताछ और केस की दिशा विजय के राजनीतिक करियर को बहुत ज्यादा प्रभावित करेगी। एक सुपरस्टार के तौर पर विजय का रुतबा अपनी जगह है, लेकिन एक नेता के तौर पर जवाबदेही की ये कसौटी ही अब उनके भविष्य का रास्ता तय करेगी।

निश्चित रूप से, उन 41 परिवारों के आंसू किसी भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा से बहुत बड़े हैं, और यही इस पूरी कानूनी लड़ाई का सबसे संवेदनशील हिस्सा है।