गहरे समुद्र से उठी प्रलय की लहर रूस ने दुनिया के सामने लाया अपना डूम्सडे न्यूक्लियर टॉरपीडो पोसाइडन
News India Live, Digital Desk : दुनिया जब दूसरे तनावों में उलझी है, तब रूस ने गहरे समुद्र के नीचे से एक ऐसा हथियार दुनिया के सामने ला दिया है, जिसे 'प्रलय लाने वाला हथियार' (Doomsday Weapon) कहा जा रहा है। रूस ने हाल ही में अपनी सबसे आधुनिक और रहस्यमयी न्यूक्लियर पनडुब्बी 'बेलगोरोड' (Belgorod) को खतरनाक 'पोसाइडन' (Poseidon) न्यूक्लियर टॉरपीडो के साथ तैनात कर दिया है। यह कोई आम हथियार नहीं है, बल्कि एक ऐसा मानवरहित अंडरवाटर ड्रोन है, जिसे पूरी की पूरी सभ्यताओं को खत्म करने की क्षमता रखने वाला बताया जा रहा है।
क्या है पोसाइडन और यह क्यों इतना खतरनाक है?
पोसाइडन, जिसे NATO 'कैनियन' (Kanyon) के नाम से जानता है, दुनिया का सबसे बड़ा टॉरपीडो है। यह करीब 20 मीटर (65 फीट) से भी ज़्यादा लंबा है। इसे एक छोटी न्यूक्लियर पनडुब्बी या एक बहुत बड़ा ड्रोन कहा जा सकता है, जो अपने छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर की वजह से लगभग असीमित दूरी तक सफर कर सकता है।इसे इस तरह बनाया गया है कि यह समुद्र में एक किलोमीटर से भी ज्यादा की गहराई में बहुत तेज़ रफ़्तार (लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटा) से चल सकता है।
इसकी सबसे डरावनी बात है इसका काम करने का तरीका। यह दुश्मन के तटीय शहरों के पास जाकर अपने अंदर लगे कई मेगाटन के न्यूक्लियर बम में विस्फोट करता है।इस विस्फोट से समुद्र में एक बहुत बड़ी और रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा होने की आशंका है, जो तटीय शहरों को तबाह कर सकती है और उन इलाकों को दशकों तक रहने लायक नहीं छोड़ेगी।
'बेलगोरोड' पनडुब्बी: पोसाइडन का 'घर'
पोसाइडन को ले जाने के लिए रूस ने खास तौर पर 'बेलगोरोड' नाम की पनडुब्बी तैयार की है।यह दुनिया की सबसे लंबी पनडुब्बियों में से एक है, जिसकी लंबाई 184 मीटर है। यह एक 'मदरशिप' की तरह काम करती है, जो अपने अंदर 6 से 8 पोसाइडन टॉरपीडो ले जा सकती है।बेलगोरोड को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह गहरे समुद्र में गुप्त मिशन को अंजाम दे सके, जहाँ इसे पकड़ पाना लगभग नामुमकिन है।
रूस का कहना है कि यह हथियार उन देशों के लिए एक जवाब है, जिनके पास एडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम हैं। जहाँ मिसाइलों को हवा में रोका जा सकता है, वहीं पोसाइडन समुद्र की गहराइयों में छिपकर अपने लक्ष्य तक पहुँच सकता है, जिससे इसे रोकना लगभग असंभव हो जाता है। हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पोसाइडन के सफल परीक्षण की पुष्टि भी की है, जिसके बाद से दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है।