हाईटेक शहर की शर्मनाक सच्चाई नोएडा के पॉश इलाके में एक ज़िंदगी बेसमेंट के पानी में डूब गई
News India Live, Digital Desk: नोएडा के सेक्टर-100 स्थित लोटस बुलेवर्ड (Lotus Boulevard) सोसाइटी में जो हुआ, उसने हम सबको अंदर से झकझोर कर रख दिया है। एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर, युवराज मेहता (Yuvraj Mehta), जो अपने परिवार का सहारा था, उसकी जिंदगी बेसमेंट में भरे गंदे पानी में घुटकर ख़त्म हो गई। और सबसे दुखद बात? प्रशासन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि "हमने कोशिश की, लेकिन बचा नहीं पाए।"
आखिर हुआ क्या था?
बताया जा रहा है कि युवराज बेसमेंट में अपनी कार चेक करने या पार्क करने गए थे (कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक बेसमेंट में काम चल रहा था या रिसाव देखने गए थे)। अचानक वहां पानी का बहाव इतना तेज हुआ कि वो फंस गए। यह कोई सामान्य पानी नहीं था, यह सीवर और मलबे वाला पानी था।
30 घंटे का वो खौफनाक इंतज़ार
युवराज बेसमेंट में फंसे थे। उनका परिवार, दोस्त और पूरी सोसाइटी ऊपर खड़ी उम्मीद लगा रही थी। मौके पर NDRF और SDRF की टीमें बुलाई गईं। पंप लगाए गए ताकि पानी निकाला जा सके।
लेकिन यह रेस्क्यू ऑपरेशन घंटों तक चलता रहा। समय बीतता गया और उम्मीद की डोर कमजोर होती गई। आखिर में, जब प्रशासन को कामयाबी नहीं मिली, तो एक अधिकारी ने कथित तौर पर घरवालों से कहा— "हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर ली है, अब आप भगवान से दुआ कीजिये।"
जरा सोचिए, एक परिवार पर क्या बीती होगी यह सुनकर?
सवालों के घेरे में कौन?
- क्या बिल्डर की लापरवाही थी? बेसमेंट में इतना पानी क्यों और कैसे भरा?
- ड्रेनेज सिस्टम इतना ख़राब क्यों था?
- क्या हमारे 'हाईटेक' रेस्क्यू सिस्टम के पास इतनी क्षमता नहीं कि एक बेसमेंट से किसी को समय रहते निकाल सकें?
अंत में युवराज का शव ही बाहर आया। एक ज़िंदादिल इंसान अब हमारे बीच नहीं है। यह घटना सिर्फ एक 'हादसा' नहीं है, यह एक 'चेतावनी' है। हम महंगी दीवारों के बीच सुरक्षित महसूस तो करते हैं, लेकिन बुनियादी ढांचा (Infrastructure) अंदर से कितना खोखला है, यह युवराज की मौत ने साबित कर दिया है।