झारखंड में गाँव की सरकार का राज शुरू ,पेसा एक्ट लागू, अब कलेक्टर नहीं, ग्राम सभा लेगी ये 5 बड़े फैसले
News India Live, Digital Desk : झारखंड अलग राज्य बना ही था आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए। लेकिन सालों से एक कानून की कमी खल रही थी वो था पेसा एक्ट (PESA Act)। लेकिन अब इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म हो गई हैं। राज्य सरकार ने पेसा कानून की नियमावली (Rules) को लागू कर दिया है।
यह खबर गाँव में रहने वाले हर इंसान के लिए किसी त्यौहार से कम नहीं है। अब तक आप छोटी-छोटी परमिशन के लिए बीडीओ (BDO), सीओ (CO) और थानेदार के चक्कर काटते थे, लेकिन अब यह पावर आपके गाँव की ग्राम सभा के पास आ गई है।
क्या बदलेगा आपकी ज़िंदगी में? (आसान शब्दों में समझें)
पेसा कानून का सबसे बड़ा मकसद है ग्राम सभा को ताकतवर बनाना। यहाँ जानिए कि आपको कौन-कौन से हक मिल गए हैं:
1. जमीन कोई छीन नहीं सकता
सबसे बड़ा डर होता था जमीन जाने का। पेसा एक्ट के तहत, अनुसूचित क्षेत्रों में अब ग्राम सभा की मर्जी के बिना कोई भी (चाहे वो सरकार हो या प्राइवेट कंपनी) आपकी जमीन का अधिग्रहण नहीं कर सकती। अगर कोई जमीन हड़पी गई है, तो उसे वापस दिलाने की ताकत भी ग्राम सभा के पास होगी।
2. छोटे-मोटे झगड़ों का निपटारा गाँव में
अब पुलिस थाना जाने की जरूरत नहीं। गाँव के छोटे-मोटे विवाद, पारिवारिक झगड़े या सामाजिक मामले अब कोर्ट-कचहरी में नहीं घिसटेंगे। ग्राम सभा पारम्परिक तरीके से गाँव में ही इनका फैसला करेगी। इससे समय और पैसा दोनों बचेगा।
3. बालू और खनिज पर हक़
गाँव की नदी से बालू कौन निकालेगा? जंगल की उपज (जैसे महुआ, केंदू पत्ता) कौन बेचेगा? अब तक इसका ठेका ऊपर से तय होता था। लेकिन अब बालू घाटों और लघु वन खनिजों का मैनेजमेंट ग्राम सभा खुद करेगी। मतलब, गाँव का पैसा गाँव में ही रहेगा।
4. शराबबंदी या दुकान? फैसला आपका
गाँव में शराब की दुकान खुलेगी या नहीं, यह अब आबकारी विभाग नहीं, बल्कि आपके गाँव की महिलाएं और बुजुर्ग (ग्राम सभा) तय करेंगे। अगर सभा चाहे तो गाँव में शराब पर पूरी तरह बैन लगा सकती है। नशा मुक्त समाज बनाने के लिए यह बड़ा हथियार है।
5. पुलिस को भी देनी होगी जानकारी
अगर गाँव के किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज होती है, तो पुलिस को ग्राम सभा को इसकी जानकारी देनी पड़ेगी। यह नियम पुलिस की मनमानी रोकने में बहुत मददगार साबित होगा।
क्यों यह बहुत बड़ी बात है?
दोस्तों, गांधी जी कहते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। पेसा एक्ट उसी सपने को सच करता है। यह लोकतंत्र को रांची (राजधानी) से निकालकर सुदूर गांवों के जंगलों तक ले आया है।
अब जिम्मेदारी गाँव वालों की है कि वे इन अधिकारों को समझें, ग्राम सभा की बैठकों में हिस्सा लें और अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करें।