सैकड़ों यात्रियों की जान पर बन आई थी ,झारखंड में मौत पटरी पर थी, लेकिन ड्राइवर ने अनहोनी टाल दी
News India Live, Digital Desk: ट्रेन का सफर सबसे सुरक्षित माना जाता है, लेकिन जरा सोचिए कि आप मजे से विंडो सीट पर बैठे हों और जिस पटरी पर ट्रेन 100 की रफ़्तार में दौड़ रही है, वो आगे से टूटी हो? यह खौफनाक मंजर आज हकीकत में बदल सकता था झारखंड के लोहरदगा (Lohardaga) में।
भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि एक बड़ी अनहोनी होते-होते रह गई और सैकड़ों परिवार उजड़ने से बच गए।
आखिर हुआ क्या था?
मामला लोहरदगा रेलवे सेक्शन का है। खबरों के मुताबिक़, यहाँ रेलवे ट्रैक (Patri) में 'फ्रैक्चर' यानी दरार आ गई थी। सर्दी के मौसम में अक्सर पटरियां सिकुड़ने (Contraction) की वजह से क्रैक हो जाती हैं, जो बेहद खतरनाक होता है। अगर इस टूटी हुई पटरी के ऊपर से तेज रफ़्तार ट्रेन गुजर जाती, तो ट्रेन के डिब्बे पटरी से नीचे उतर सकते थे (Derailment) और भयानक हादसा हो सकता था।
सही समय पर बजी खतरे की घंटी
गनीमत यह रही कि रेलवे की पेट्रोलिंग टीम (गश्ती दल) या लाइनमैन की नजर इस टूटी हुई पटरी पर वक्त रहते पड़ गई। इसे कहते हैं मुस्तैदी! जैसे ही यह गड़बड़ी दिखी, तुरंत अलर्ट जारी किया गया और उस रूट पर आने वाली ट्रेनों को खतरा होने से पहले ही रोक दिया गया या धीमी रफ़्तार/सावधानी के आदेश दिए गए।
यात्रियों की सांसे अटकीं
सोचिए, उन यात्रियों की हालत क्या रही होगी जब उन्हें पता चला होगा कि वो जिस रास्ते से गुजरने वाले थे, वहां यमराज बाहें फैलाए खड़े थे। जब पटरियों की मरम्मत का काम (Repair work) शुरू हुआ, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस वजह से रेल परिचालन थोड़ी देर के लिए प्रभावित जरूर हुआ, लेकिन जान बची तो लाखों पाए!
रेलवे के इंजीनियरों ने मौके पर पहुँचकर पटरी को ठीक किया (क्लैम्प वगैरह लगाकर), जिसके बाद गाड़ियों को सुरक्षित तरीके से निकाला गया।
सबक भी है और तारीफ भी
इस घटना से एक बात तो साफ है कि रेलवे ट्रैक की निगरानी (Monitoring) कितनी जरूरी है। अक्सर हम रेलवे स्टाफ को कोसते हैं, लेकिन आज इन्हीं गुमनाम हीरो की वजह से एक बहुत बड़ा हादसा इतिहास के पन्नों में दर्ज होने से बच गया। ठंड में पटरियों का चटकना आम है, इसलिए अभी रेलवे को और ज्यादा चौकन्ना रहने की जरूरत है।