राजस्थान की धरती से गूंजा PoK का संकल्प जगद्गुरु रामभद्राचार्य की हुंकार

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News India Live, Digital Desk: जब भी बात देश के गौरव और अखंड भारत की होती है, तो जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी के विचार हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। उनकी बातों में न केवल धार्मिक गहराई होती है, बल्कि राष्ट्र के प्रति एक ऐसी बेबाकी होती है जो सीधे दिल को छू लेती है। हाल ही में राजस्थान में आयोजित एक धार्मिक सभा में उन्होंने एक ऐसी बात कही, जिससे वहां मौजूद हजारों लोगों का जोश दोगुना हो गया।

रामभद्राचार्य जी ने एक बार फिर खुले मंच से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK (Pakistan Occupied Kashmir) को लेकर अपना रुख साफ कर दिया। चलिए जानते हैं उन्होंने अपनी वाणी से राष्ट्रवाद की कौन सी नई लौ जलाई है।

"पीओके हमारी जागीर है, किसी और की नहीं"

राजस्थान की इस पावन धरा से उन्होंने गर्जना करते हुए कहा कि PoK हमेशा से भारत का अटूट हिस्सा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि भगवान राम और कृष्ण की धरती अधूरी है जब तक कि हमारी वो जमीन हमारे पास वापस नहीं आ जाती जिसे दुश्मनों ने कब्जाया हुआ है।

रामभद्राचार्य जी ने बहुत ही सरल लेकिन कड़क शब्दों में कहा कि दुनिया चाहे कुछ भी कहे, लेकिन शास्त्रों और इतिहास के पन्नों में PoK भारत का था, है और बहुत जल्द आधिकारिक तौर पर होगा भी। उन्होंने भारत सरकार से भी अपील की कि अखंड भारत के संकल्प को अब हकीकत में बदलने का समय आ गया है।

जज़्बातों से भरी सभा

भले ही जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी आँखों से देख नहीं सकते, लेकिन उनकी "दृष्टि" इतनी व्यापक है कि वे वर्तमान हालातों को भांप लेते हैं। उनके इस बयान के बाद सभा में 'जय श्रीराम' और 'भारत माता की जय' के नारों से पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम में डूब गया। वहां मौजूद लोग केवल उनके ज्ञान को सुनने नहीं आए थे, बल्कि अपने भीतर दबी उस राष्ट्रीय भावना को महसूस करने आए थे जो गुरु जी ने जगा दी।

PoK और अखंड भारत का सपना

रामभद्राचार्य जी ने अपने भाषण में अक्सर यह संकेत दिया है कि सांस्कृतिक और भौगोलिक दृष्टि से भारत को पूर्ण होना जरूरी है। उन्होंने राजस्थान की सभा में याद दिलाया कि शूरवीरों की इस भूमि ने हमेशा से देश के लिए बलिदान दिया है, और अब वक्त है अपनी सरहद को वहीं तक ले जाने का जहाँ वो सच में होनी चाहिए।

लोगों की राय

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर गुरु जी का यह वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। लोग कह रहे हैं कि "जो बात नेता नहीं कह पाते, वो संत कह रहे हैं।" राजस्थान से निकली यह आवाज़ अब धीरे-धीरे पूरे देश की चर्चा का विषय बन गई है।

सच तो यह है दोस्तों कि राष्ट्रवाद और आध्यात्म जब एक साथ मिलते हैं, तो ऐसी ही प्रभावशाली वाणी निकलती है। रामभद्राचार्य जी का यह बयान उन सभी भारतीयों के लिए एक संदेश है जो अपने देश की अखंडता के लिए सपना देखते हैं।

आपको क्या लगता है? क्या जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का यह संकल्प जल्द ही साकार होगा? अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर साझा करें।