कोटा का दर्द और लाखों बच्चों का तनाव... सरकार ने सुनी, अब आसान होंगे NEET-JEE के एग्जाम?
डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना... यह सपना जितना खूबसूरत है, इसे पाने का रास्ता उतना ही मुश्किल और तनाव भरा हो गया है। लाखों बच्चे अपनी नींद, अपना बचपन, सब कुछ दांव पर लगाकर कोटा जैसे शहरों में कोचिंग की महंगी और जानलेवा रेस में दौड़ रहे हैं। आए दिन वहां से आने वाली दिल दहला देने वाली खबरें हम सबके मन को झकझोर कर रख देती हैं।
लेकिन अब, शायद इन लाखों बच्चों के आंसुओं और तनाव को केंद्र सरकार ने सुन लिया है। एक ऐसी खबर आई है जो देश के करोड़ों छात्रों और उनके माता-पिता के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है। सरकार अब NEET और JEE जैसी देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं के कठिनाई स्तर (Difficulty Level) को कम करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
मकसद: कोचिंग के ‘चंगुल’ से आजादी
सरकार के इस बड़े कदम के पीछे एक बहुत ही सीधी और स्पष्ट सोच है - छात्रों को कोचिंग सेंटरों की dépendance से बाहर निकालना।
- क्यों है यह जरूरी? अभी तक होता यह था कि इन परीक्षाओं का लेवल इतना मुश्किल होता था कि स्कूल की पढ़ाई से इन्हें पास करना लगभग नामुमकिन सा लगता था। इसने एक ऐसी मजबूरी पैदा कर दी, जहां हर बच्चे को लाखों रुपये खर्च करके कोचिंग लेना ही पड़ता था।
- क्या होगा बदलाव? सरकार अब इस पूरे सिस्टम की समीक्षा कर रही है। एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है जो पिछले कई सालों के क्वेश्चन पेपर, छात्रों के रिजल्ट और CBSE के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों के बोर्ड के सिलेबस का गहराई से विश्लेषण कर रही है।
इसका सीधा मतलब है कि भविष्य में NEET और JEE के प्रश्न पत्र ऐसे बनाए जाएंगे:
- जो आपकी समझ और कॉन्सेप्ट को परखें, न कि सिर्फ रटी-रटाई चीजों को।
- जिन्हें हल करने के लिए आपको किसी महंगे कोचिंग के ‘शॉर्टकट’ की जरूरत न पड़े, बल्कि आपकी स्कूल की किताबों का ज्ञान ही काफी हो।
- जो हर बोर्ड (चाहे CBSE हो या कोई स्टेट बोर्ड) के छात्रों को बराबरी का मौका दें।
यह फैसला सिर्फ एक परीक्षा के पैटर्न में बदलाव नहीं है, बल्कि यह उस जानलेवा दबाव को कम करने की एक कोशिश है जो हमारे बच्चों की मुस्कान छीन रहा है। यह उस सपने को बचाने की एक पहल है, जो पैसों के बोझ तले दबकर दम तोड़ देता है। अगर यह लागू होता है, तो शायद भविष्य में किसी भी बच्चे को डॉक्टर या इंजीनियर बनने के लिए अपना बचपन और अपनी मानसिक शांति कुर्बान नहीं करनी पड़ेगी।