डेटिंग का नया नाम क्वांटम डेटिंग ,जब रिश्ता एक साथ मज़बूत भी हो और खत्म भी, तो क्या करें?

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News India Live, Digital Desk : आजकल प्यार और रिश्तों के बीच की लकीरें बहुत धुंधली होती जा रही हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि आज के दौर में दो लोग घंटों बात करते हैं, साथ घूमते हैं और भावनात्मक रूप से एक-दूसरे के करीब भी होते हैं, लेकिन जब 'कमिटमेंट' की बात आती है, तो मामला कहीं अटक जाता है। इसी उलझन को नया नाम दिया गया है क्वांटम डेटिंग।

आख़िर क्वांटम डेटिंग है क्या?
विज्ञान में 'क्वांटम' का मतलब कुछ ऐसा होता है जो एक साथ दो अलग-अलग अवस्थाओं (states) में रह सके। डेटिंग की भाषा में कहें तो इसका मतलब है एक ऐसा रिश्ता जो एक साथ 'सीरियस' भी है और 'Casual' भी। इसमें दो लोग इस कदर साथ होते हैं जैसे वो रिलेशनशिप में हों, लेकिन उनके दिमाग के एक कोने में यह बात हमेशा रहती है कि वो अभी भी सिंगल हैं और दूसरे विकल्पों (options) के लिए खुले हैं।

ये 'सिचुएशनशिप' से कैसे अलग है?
अक्सर लोग इसे सिचुएशनशिप मान लेते हैं, पर यह उससे एक कदम आगे है। क्वांटम डेटिंग में गहराई बहुत ज़्यादा होती है। आप सामने वाले के बहुत करीब होते हैं, उनकी परवाह करते हैं, लेकिन बस एक 'लेबल' या भविष्य के वादों से दूरी बनाकर रखते हैं। यह एक तरह का 'चेक' है कि क्या मुझे इससे बेहतर कुछ मिल सकता है?

आख़िर युवा ऐसा क्यों कर रहे हैं?
इसका सबसे बड़ा कारण है 'डर'—एक तो कमिटमेंट का डर और दूसरा कुछ बेहतर खो देने का डर (FOMO)। आज की डिजिटल दुनिया में ऐप्स ने हमें इतने विकल्प दे दिए हैं कि इंसान किसी एक पर रुकने से हिचकिचाता है। उसे लगता है कि अगर वह इस रिश्ते में 'Lock' हो गया, तो शायद उसे वह 'परफेक्ट' इंसान कभी नहीं मिलेगा जो कहीं और हो सकता है।

क्वांटम डेटिंग के फायदे और नुकसान

  • फायदा: उन लोगों के लिए यह ठीक है जो आज़ादी चाहते हैं और किसी भारी दबाव (Pressure) में नहीं रहना चाहते। उन्हें वह भावनात्मक सपोर्ट भी मिलता रहता है जो एक रिश्ते में ज़रूरी है।
  • नुकसान: इसका सबसे बुरा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसमें असुरक्षा (Insecurity) की भावना बनी रहती है। आप हमेशा सोचते रहते हैं कि कल को सामने वाले ने अगर कोई और चुन लिया तो क्या होगा? इससे दिल टूटने और भ्रम बढ़ने का ख़तरा ज़्यादा रहता है।

अंत में बस इतना:
रिश्ते भरोसा मांगते हैं। अगर आप क्वांटम डेटिंग जैसी किसी उलझन में हैं, तो साफ़-साफ़ बात करना ही सबसे सही रास्ता है। "अभी क्या चल रहा है?" जैसे सीधे सवाल आपको सालों की मानसिक थकान से बचा सकते हैं। प्यार भले ही क्वांटम लेवल पर कितना भी उलझा हो, दिल की तसल्ली हमेशा साफ़ बातों से ही मिलती है।