सत्ता का रसूख या कानून का शिकंजा? रायपुर के उस हिट-एंड-रन केस में आख़िर पुलिस ने दबोचा विधायक का बेटा

Post

News India Live, Digital Desk: हम सब जानते हैं कि सड़कें सबके लिए बराबर होनी चाहिए, लेकिन जब आधी रात को कोई रफ़्तार भरी लग्ज़री कार किसी को कुचलकर निकल जाती है, तो दिल दहल जाता है। रायपुर में हुए इस हालिया हिट-एंड-रन केस ने न केवल शहर की सुरक्षा पर सवाल उठाए, बल्कि इसमें शामिल रसूखदार नाम ने राजनीति भी गर्मा दी थी।

हुआ क्या था उस खौफनाक रात को?
खबरों की मानें तो यह हादसा रायपुर के एक पॉश इलाके में हुआ। तेज़ रफ़्तार कार ने बेकसूर लोगों को अपनी चपेट में लिया और ड्राइवर मौके से फरार हो गया। पुलिस के लिए यह केस शुरुआत में थोड़ा पेचीदा था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों ने तस्वीर साफ कर दी। जैसे ही यह पता चला कि कार बीजेपी विधायक के बेटे की है, सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछने लगे— "क्या इसे भी छोड़ा जाएगा?"

पुलिस की कार्रवाई: सस्पेंस और फिर गिरफ़्तारी
अक्सर राजनेताओं के करीबियों के मामलों में पुलिस थोड़ी 'ढुलमुल' नज़र आती है, पर इस बार रायपुर पुलिस पर जनता का दबाव काफी था। विधायक के बेटे की तलाश में छापेमारी की गई और आख़िरकार पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव के जांच कर रहे हैं। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है कि आखिर इतनी लापरवाही के पीछे क्या वजह थी—महज़ रफ़्तार का शौक या कुछ और?

सियासी गलियारों में खलबली
चुनावी माहौल हो या न हो, विधायक के परिवार का नाम आने से विपक्ष को भी एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि सजा ऐसी मिलनी चाहिए कि कल को कोई और रईसजादा सड़क पर निकलने से पहले किसी की जान की कीमत समझे। रसूख किसी के किए हुए अपराध को ढंकने की चादर नहीं हो सकता।

आगे क्या होगा?
कानूनी तौर पर इस केस की फाइल अब कोर्ट में है। विधायक के बेटे की गिरफ्तारी एक संदेश तो है, लेकिन असली इंसाफ तभी होगा जब कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। तब तक रायपुर की जनता और पीड़ित परिवार सिर्फ एक ही बात चाहता है— इंसाफ, बिना किसी पक्षपात के।

आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि वाकई हमारा सिस्टम बड़े रसूखदारों को सलाखों के पीछे पहुँचाने के लिए पूरी तरह तैयार है? हमें कमेंट में ज़रूर बताएँ।