इन 5 जिलों की बदलने वाली है किस्मत! बिछ गई 240 KM लंबी नई रेल लाइन की पटरी, अब दौड़ेगी विकास की ट्रेन
उत्तर प्रदेश के उन इलाकों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है, जहाँ के लोगों ने ट्रेन को आज तक सिर्फ फिल्मों में ही देखा था या फिर उन्हें ट्रेन पकड़ने के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता था। रेलवे ने एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है, जो संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच जिलों की पूरी तस्वीर बदलकर रख देगा।
इन 5 जिलों से होकर गुजरने वाली 240 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का सबसे मुश्किल काम पूरा हो चुका है, और अब जल्द ही इस पर ट्रेनें दौड़ाने का काम तेज होने वाला है।
क्या है यह 'सपनों की रेल लाइन' प्रोजेक्ट?
यह कोई मामूली रेल लाइन नहीं, बल्कि खलीलाबाद से बहराइच को जोड़ने वाला एक ऐसा महा-प्रोजेक्ट है, जो इन पिछड़े इलाकों के लिए विकास का 'शॉर्टकट' साबित होगा।
- कुल लंबाई: 240.26 किलोमीटर
- कुल लागत: लगभग 5000 करोड़ रुपये
- क्या बनेगा: 32 स्टेशन, 12 छोटे हॉल्ट स्टेशन, और 4 बड़े जंक्शन। भिनगा, इकौना और उतरौला जैसे कई इलाकों में बिल्कुल नए स्टेशन बनेंगे।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा प्रोजेक्ट 2026 तक पूरा हो सकता है।
कौन हैं वो 5 खुशकिस्मत जिले?
- संतकबीरनगर: यहीं के खलीलाबाद से इस विकास यात्रा की शुरुआत होगी।
- सिद्धार्थनगर: डुमरियागंज जैसे इलाकों में रहने वालों के लिए अब लखनऊ-दिल्ली दूर नहीं होगा।
- बलरामपुर: यहां के व्यापार और रोजगार को नए पंख लगेंगे।
- श्रावस्ती: भगवान बुद्ध की इस पवित्र धरती पर अब ट्रेनें पहुंचेंगी, जिससे देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आएंगे।
- बहराइच: यह इस लाइन का आखिरी स्टेशन होगा और एक बड़े रेल हब के रूप में उभरेगा।
इन जिलों के सैकड़ों गांव पहली बार ट्रेन की सीटी की आवाज सुनेंगे!
यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि एक 'जादू की छड़ी' है, जो कैसे बदलेगी जिंदगी?
- समय आधा, तरक्की डबल: जो सफर पहले घंटों में होता था, अब मिनटों में पूरा होगा।
- किसानों की बल्ले-बल्ले: किसान अपनी सब्जियां, फल और अनाज सीधे बड़े शहरों की मंडियों तक भेज पाएंगे, जिससे उन्हें दोगुनी कीमत मिलेगी।
- हजारों नई नौकरियां: लाइन बिछाने से लेकर स्टेशन बनने तक, हजारों मजदूरों और स्थानीय लोगों को काम मिलेगा।
- पर्यटन को लगेंगे पंख: श्रावस्ती जैसे बौद्ध तीर्थ स्थल तक पहुंचना आसान होगा, जिससे यहां होटल और छोटे-मोटे धंधे बढ़ेंगे।
- व्यापार होगा आसान: सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजना सस्ता और तेज हो जाएगा, जिससे नए-नए उद्योग लगेंगे।
कुल मिलाकर, यह रेल लाइन सिर्फ पटरियों का एक जाल नहीं, बल्कि इन पांचों जिलों के लिए उम्मीद, तरक्की और एक बेहतर कल का रास्ता है।