बीमारी ऐसी कि डॉक्टर्स की भी नींद उड़ गई, जानिए क्या है निपाह वायरस, जो अब बंगाल में दस्तक दे रहा है
News India Live, Digital Desk: कोरोना की उन कड़वी यादों के बीच अब एक और खबर हमें थोड़ा सतर्क करने वाली आई है। खबर पश्चिम बंगाल से है, जहाँ 'निपाह वायरस' (Nipah Virus) के कुछ संदिग्ध मामले सामने आने के बाद दिल्ली की गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मामला इतना संजीदा है कि केंद्र सरकार ने बिना देरी किए अपनी एक Special Response Team बंगाल रवाना कर दी है।
जब हम किसी नए वायरस के बारे में सुनते हैं, तो डर लगना स्वाभाविक है। लेकिन पैनिक (घबराहट) से ज्यादा जरूरी है इसके बारे में सही जानकारी होना।
आखिर केंद्र की टीम को बंगाल क्यों जाना पड़ा?
जब भी किसी राज्य में किसी खतरनाक वायरस के लक्षण मिलते हैं, तो उसे शुरुआती स्तर पर रोकना ही एकमात्र उपाय होता है। केंद्र से आई यह टीम न सिर्फ स्थानीय अस्पतालों का दौरा करेगी, बल्कि इस बात की भी जांच करेगी कि यह संक्रमण कितना फैल सकता है और इसके सोर्स (स्त्रोत) क्या हैं। यह एक 'प्रोएक्टिव' कदम है ताकि हालात हाथ से न निकलें।
निपाह वायरस इतना खतरनाक क्यों है?
सच कहें तो निपाह को लेकर चिंता की सबसे बड़ी वजह ये है कि फिलहाल इसके लिए कोई खास वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। इसका डेथ रेट (मृत्यु दर) बहुत ज्यादा होता है—यानी अगर यह फैल जाए, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। यह वायरस फल खाने वाले चमगादड़ों (Fruit Bats) से फैलता है। अगर किसी चमगादड़ ने किसी फल को खाकर आधा छोड़ दिया है और उस फल को किसी इंसान या पालतू जानवर ने खा लिया, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
लक्षण जो आम बुखार जैसे दिखते हैं
हैरानी की बात ये है कि शुरुआती दिनों में यह सामान्य फ्लू या बुखार जैसा लगता है। सिरदर्द, गले में खराश और तेज बुखार इसके मुख्य लक्षण हैं। लेकिन यह इतनी जल्दी बढ़ता है कि यह सीधे दिमाग पर असर करता है और मरीज 'एनसेफलाइटिस' (दिमाग में सूजन) का शिकार हो सकता है।
हमें क्या करना चाहिए? (सिर्फ सावधानी ही बचाव है)
डरने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।
- कहीं भी नीचे गिरे हुए या पक्षियों द्वारा कुतरे हुए फलों को हाथ न लगाएं और न ही खाएं।
- फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं।
- अगर किसी में फ्लू के गंभीर लक्षण दिखें, तो फौरन डॉक्टर से सलाह लें।
अभी बंगाल में हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन यह टीम वहाँ इसलिए है ताकि केरल जैसी स्थिति यहाँ पैदा न हो। सुरक्षित रहें और केवल भरोसेमंद जानकारियों पर ही यकीन करें।