पत्रकारिता के भीष्म पितामह एच.के. दुआ का निधन दो प्रधानमंत्रियों के रहे मीडिया सलाहकार, पद्म भूषण से थे सम्मानित

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News India Live, Digital Desk : एच.के. दुआ का अंतिम संस्कार 5 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजे दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट में किया जाएगा। उनके परिवार में उनकी पत्नी अदिति दुआ और बेटा प्रशांत हैं।

1. प्रमुख समाचार पत्रों के संपादक (Editorial Excellence)

दुआ साहब को देश के चार बड़े और प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के संपादन का दुर्लभ गौरव प्राप्त था:

द हिंदुस्तान टाइम्स (1987-94): संपादक के रूप में कार्य किया।

द इंडियन एक्सप्रेस (1994-96): प्रधान संपादक (Editor-in-Chief)।

द ट्रिब्यून (2003-09): प्रधान संपादक के रूप में इस अखबार की राष्ट्रीय साख को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

द टाइम्स ऑफ इंडिया (1997-98): संपादकीय सलाहकार के रूप में योगदान दिया।

2. प्रधानमंत्रियों के भरोसेमंद सलाहकार (Media Advisor to PMs)

वे न केवल एक बेहतरीन पत्रकार थे, बल्कि सत्ता के गलियारों में भी उनकी गहरी पैठ और सम्मान था:

अटल बिहारी वाजपेयी और एच.डी. देवेगौड़ा: इन दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल के दौरान वे उनके मीडिया सलाहकार रहे। उन्होंने सरकार और मीडिया के बीच एक सेतु का काम किया।

3. कूटनीति और राजनीति में भूमिका (Diplomacy & Politics)

डेनमार्क में राजदूत: 2001 से 2003 के बीच उन्होंने डेनमार्क में भारत के राजदूत के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

राज्यसभा सदस्य (2009-15): वे राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किए गए थे, जहाँ उन्होंने विदेश मामलों, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर प्रखरता से अपनी राय रखी।

4. सम्मान और उपलब्धियां (Awards & Recognition)

पद्म भूषण: पत्रकारिता और सार्वजनिक सेवा में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें 2008 में देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा गया था।

मानद उपाधियां: पंजाब विश्वविद्यालय और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने उन्हें डी. लिट (मानद) की उपाधि प्रदान की थी।

5. 'संपादकीय स्वतंत्रता' के प्रखर पैरोकार

एच.के. दुआ को उनकी निष्पक्षता और संपादकीय स्वतंत्रता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता था। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने उन्हें याद करते हुए कहा, "वे उस दौर के संपादक थे जब संपादक होना वास्तव में मायने रखता था।" उन्होंने कभी भी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया।