भारत में बढ़ा डार्क टूरिज्म का क्रेज जलियांवाला बाग से भोपाल गैस कांड तक क्यों इन खौफनाक यादों की ओर खिंचे चले जा रहे हैं युवा?
News India Live, Digital Desk : पर्यटन की दुनिया में एक नया शब्द गूंज रहा है 'डार्क टूरिज्म'। इसे 'ग्रीफ टूरिज्म' (Grief Tourism) या 'ब्लैक टूरिज्म' भी कहा जाता है। यह उन स्थानों की यात्रा है जो मृत्यु, आपदा, संघर्ष या ऐतिहासिक आघात (Trauma) से जुड़े हैं। जलियांवाला बाग के शहीदों की दीवारों पर गोलियों के निशान हों या भोपाल की वो वीरान यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री, युवा पीढ़ी अब किताबी इतिहास को अपनी आंखों से महसूस करना चाहती है।
आखिर क्यों युवा जा रहे हैं 'काली यादों' के पास?
विशेषज्ञों और हालिया सर्वे के अनुसार, युवाओं के इस झुकाव के पीछे 4 बड़े कारण हैं:
सच्चे अनुभवों की तलाश (Authentic Experiences): नई पीढ़ी को 'ग्लॉसी' विज्ञापनों और कृत्रिम सुंदरता से ज्यादा 'वास्तविकता' पसंद है। वे इतिहास के उन पहलुओं को देखना चाहते हैं जो अक्सर पर्यटन के विज्ञापनों में छिपा दिए जाते हैं।
मानवीय संवेदना और जुड़ाव: जलियांवाला बाग या सेलुलर जेल (अंडमान) जैसी जगहों पर जाकर युवाओं को अपने पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान से भावनात्मक जुड़ाव महसूस होता है।
सीखने की इच्छा (Educational Value): भोपाल गैस त्रासदी या कारगिल वॉर मेमोरियल जैसी जगहें उन्हें कॉर्पोरेट लापरवाही, युद्ध के परिणामों और मानवीय लचीलेपन (Resilience) के बारे में गहराई से सिखाती हैं।
सोशल मीडिया और 'डार्क' कंटेंट: 'चेरनोबिल' जैसी वेब सीरीज और ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स के वीडियो ने अनसुनी कहानियों को जानने की जिज्ञासा बढ़ा दी है।
भारत के प्रमुख 'डार्क टूरिज्म' केंद्र (Top Sites)
| स्थान | ऐतिहासिक महत्व | युवाओं के आकर्षण का कारण |
|---|---|---|
| जलियांवाला बाग (अमृतसर) | 1919 का भीषण नरसंहार। | शहीदी कुआं और दीवारों पर गोलियों के निशान। |
| यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री (भोपाल) | दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी (1984)। | 'रिमेम्बर भोपाल' म्यूजियम और औद्योगिक विनाश के अवशेष। |
| सेलुलर जेल (अंडमान) | 'काला पानी' की सजा और यातनाएं। | सावरकर की कोठरी और स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष। |
| भानगढ़ और कुलधरा (राजस्थान) | रहस्यमयी त्याग और शापित गांव। | रात के सन्नाटे और 'भूतिया' किस्सों का रोमांच। |
| गांधी स्मृति (दिल्ली) | महात्मा गांधी का शहादत स्थल। | बापू के आखिरी कदम और उनके जीवन का अंत। |
क्या यह केवल 'तमाशबीन' होना है?
एक बहस यह भी है कि क्या इन जगहों पर जाना केवल जिज्ञासा शांत करना है या पीड़ितों का सम्मान?
जिम्मेदार पर्यटन: अधिकांश युवा इन जगहों पर 'सेल्फी' लेने के बजाय शांत रहकर विचार (Reflection) करना पसंद कर रहे हैं।
सीख: इन स्थलों का दौरा भविष्य में ऐसी गलतियों (जैसे भोपाल कांड या युद्ध) को न दोहराने की प्रेरणा देता है।
वैश्विक स्तर पर भी बढ़ रहा है ट्रेंड
दुनिया भर में डार्क टूरिज्म का बाजार 2030 तक $38.64 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। पोलैंड के ऑशविट्ज़ (Auschwitz) कंसन्ट्रेशन कैंप से लेकर जापान के हिरोशिमा पीस मेमोरियल तक, लोग अब इतिहास के 'अंधेरे' को समझने के लिए मीलों सफर तय कर रहे हैं।