बच्चे का चिड़चिड़ापन और गुस्सा पेट की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है! क्या आप जानते हैं?

Post

क्या आपका बच्चा भी अक्सर बिना बात के रोता है? बहुत ज्यादा चिड़चिड़ाता है या छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करता है? ज्यादातर माता-पिता इसे बच्चे की जिद या शरारत समझकर डांट देते हैं या नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बच्चे के इस बदलते व्यवहार का कनेक्शन उसके पेट से हो सकता है?

जी हां, हेल्थ एक्सपर्ट्स और नई रिसर्च इस बात पर जोर दे रही हैं कि बच्चों के मूड स्विंग्स और उनके पेट की सेहत के बीच एक बहुत गहरा और सीधा रिश्ता होता है। इसे 'गट-ब्रेन कनेक्शन' (Gut-Brain Connection) कहा जाता है।

क्या है यह 'गट-ब्रेन कनेक्शन'?

आसान भाषा में समझिए, हमारे पेट (आंत) और हमारे दिमाग के बीच एक सीधा 'हाईवे' होता है, जिसे नसें जोड़ती हैं। पेट में जो कुछ भी होता है, उसका सीधा सिग्नल दिमाग को मिलता है और दिमाग की हालत का असर पेट पर पड़ता है। आपने खुद भी महसूस किया होगा कि जब आप टेंशन में होते हैं, तो पेट में गड़बड़ होने लगती है। ठीक यही बच्चों के साथ भी होता है।

जब बच्चे के पेट में कोई समस्या होती है, जैसे:

  • कब्ज (Constipation):पेट ठीक से साफ न होने पर बच्चे को असहजता और दर्द महसूस होता है, जिसे वह बता नहीं पाता और चिड़चिड़ा कर व्यक्त करता है।
  • गैस या एसिडिटी (Gas or Acidity):गलत खान-पान से पेट में गैस बनने पर भी बच्चा बेचैन हो जाता है।
  • पेट में कीड़े (Stomach Worms):यह एक आम समस्या है जो बच्चे की भूख और मूड, दोनों पर बहुत बुरा असर डालती है।
  • फूड एलर्जी (Food Allergy):कई बार कुछ खास चीजें (जैसे दूध या ग्लूटेन) खाने से भी बच्चे का पेट खराब हो जाता है, जिसका असर उसके व्यवहार पर दिखता है।

जब पेट में ये सब गड़बड़ियां होती हैं, तो बच्चा शारीरिक रूप से परेशान रहता है। चूंकि छोटे बच्चे अपनी तकलीफ को बड़ों की तरह बता नहीं पाते, इसलिए वह बेचैनी उनके व्यवहार में गुस्से, रोने और चिड़चिड़ेपन के रूप में बाहर आती है।

माता-पिता क्या करें?

अगर आप अपने बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव देख रहे हैं, तो उसे डांटने या सजा देने की बजाय, इन बातों पर ध्यान दें:

  1. खान-पान को मॉनिटर करें:देखें कि बच्चा क्या खा रहा है। बहुत ज्यादा मीठा, जंक फूड और मैदे से बनी चीजें उसके पेट को खराब कर सकती हैं। खाने में दही, फल और सब्जियां शामिल करें।
  2. पानी पीने की आदत डालें:बच्चे को दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाते रहें।
  3. पेट की जांच कराएं:अगर समस्या लगातार बनी हुई है, तो बिना देर किए किसी अच्छे बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से मिलें और पेट की जांच कराएं।

याद रखिए, आपके बच्चे का हर आंसू सिर्फ जिद नहीं होता, कभी-कभी यह उसकी तकलीफ बताने का एक तरीका भी होता है। अगली बार जब आपका बच्चा गुस्सा करे, तो एक बार उसके पेट के बारे में जरूर सोचिएगा।