Nature Therapy : तनाव और बीमारियों का काल है प्रकृति से जुड़ाव, आज से ही बदलें ये आदतें और पाएं लंबी उम्र
News India Live, Digital Desk: क्या आप जानते हैं कि केवल 20 मिनट प्रकृति के बीच बिताने से आपके शरीर में 'कोर्टिसोल' (तनाव हार्मोन) का स्तर काफी कम हो सकता है? 'जी न्यूज' की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक जीवनशैली न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि यह मानसिक शांति और आंतरिक खुशी का भी सबसे बड़ा स्रोत है।
प्रकृति से जुड़ने के 4 जबरदस्त फायदे
तनाव और एंग्जायटी से मुक्ति: पेड़-पौधों के बीच रहने और पक्षियों की आवाजें सुनने से मस्तिष्क में 'सेरोटोनिन' (हैप्पी हार्मोन) का स्राव बढ़ता है। यह डिप्रेशन और चिंता को कम करने में किसी दवा की तरह काम करता है।
बेहतर नींद और इम्युनिटी: ताजी हवा में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है, जो फेफड़ों को साफ करती है और इम्युनिटी बढ़ाती है। साथ ही, प्राकृतिक रोशनी के संपर्क में आने से हमारा 'सर्केडियन रिदम' (नींद का चक्र) सुधरता है।
एकाग्रता (Focus) में वृद्धि: शोध बताते हैं कि जो लोग नियमित रूप से पार्कों या जंगलों में टहलते हैं, उनकी रचनात्मकता (Creativity) और निर्णय लेने की क्षमता शहरी वातावरण में रहने वालों की तुलना में अधिक होती है।
ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ: प्रकृति के सानिध्य में बिताया गया समय रक्तचाप को नियंत्रित करने और हृदय गति को सामान्य रखने में मदद करता है।
प्राकृतिक जीवनशैली को कैसे अपनाएं? (Simple Hacks)
जरूरी नहीं कि आप पहाड़ों या जंगलों में रहने चले जाएं, छोटे-छोटे बदलाव भी बड़ा असर डालते हैं:
अर्थिंग (Earthing): सुबह-सुबह घास पर नंगे पैर चलें। जमीन के सीधे संपर्क में आने से शरीर की सूजन कम होती है और ऊर्जा मिलती है।
इंडोर प्लांट्स: अपने घर और ऑफिस डेस्क पर छोटे पौधे (जैसे स्नेक प्लांट या एलोवेरा) लगाएं। ये न केवल हवा को शुद्ध करते हैं, बल्कि आंखों को भी सुकून देते हैं।
डिजिटल डिटॉक्स: दिन में कम से कम एक घंटा मोबाइल और लैपटॉप से दूर होकर उगते हुए सूरज को देखें या बागवानी (Gardening) करें।
सात्विक भोजन: पैकेट बंद और प्रोसेस्ड फूड के बजाय ताजे मौसमी फलों और सब्जियों को अपने आहार का हिस्सा बनाएं।
विशेषज्ञों की राय: 'नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर'
आजकल बच्चों में चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी का एक बड़ा कारण 'नेचर डेफिसिट डिसऑर्डर' (प्रकृति की कमी) बताया जा रहा है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को गैजेट्स के बजाय मिट्टी और पेड़ों के करीब ले जाएं।