झारखंड नगर निकाय चुनाव की बिसात बिछ गई ,देखिये क्या कहती है आपकी सीट की नई लिस्ट
News India Live, Digital Desk : झारखंड के शहरों में चुनावी शोर मचने की घड़ी अब करीब है। अगर आप भी सोच रहे हैं कि इस बार आपके नगर निगम या नगर पंचायत में कौन चुनाव लड़ पाएगा और कौन नहीं, तो सरकार ने इसका पूरा खाका खींच दिया है। काफी इंतज़ार और कानूनी बारीकियों के बाद 'नगर निकाय चुनाव' की आरक्षण सूची (Reservation List) आखिरकार जारी कर दी गई है।
यकीन मानिए, यह लिस्ट सिर्फ कागजों का एक ढेर नहीं है, बल्कि इसने झारखंड के कई दिग्गज नेताओं के राजनीतिक गणित को उलझाकर रख दिया है।
क्या है इस लिस्ट की सबसे बड़ी बात?
इस बार जो रिजर्वेशन लिस्ट आई है, उसने साफ़ कर दिया है कि किन शहरों के मेयर (Mayor) और किन पंचायतों के अध्यक्ष (Chairman) के पदों पर अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC), और पिछड़ी जातियों (OBC) का प्रतिनिधित्व होगा। सबसे ज्यादा चर्चा 'महिला आरक्षण' की है, जिसने आधी आबादी के लिए चुनावी रास्ते पहले से कहीं ज्यादा मज़बूत कर दिए हैं।
कई पुराने खिलाड़ियों को मिला 'झटका'
राजनीति के गलियारों में जो चर्चा सबसे तेज़ है, वो ये कि कई 'दिग्गज' चेहरों की पसंदीदा सीटें अब उनके लिए नहीं रहीं। अगर किसी सीट को अचानक महिला के लिए या किसी खास श्रेणी के लिए आरक्षित कर दिया गया है, तो ज़ाहिर है कि पुराने उम्मीदवारों को अब नया ठिकाना ढूंढना होगा या अपनी घर की किसी महिला सदस्य को मैदान में उतारना पड़ेगा। यही वो पेंच है, जिसने उम्मीदवारों की रातों की नींद उड़ा रखी है।
आपके ज़िले और शहर का क्या हाल है?
रांची, जमशेदपुर, धनबाद जैसे बड़े निगमों से लेकर छोटे निकायों तक, आरक्षण का पेच बहुत ही बारीकी से सेट किया गया है। स्थानीय लोगों के मन में अब यही सवाल है कि उनके वार्ड या मेयर पद का उम्मीदवार इस बार कौन होगा। कई इलाकों में तो लोग खुशी मना रहे हैं कि उन्हें अपनी कैटेगरी का प्रत्याशी चुनने का मौका मिलेगा, वहीं कुछ जगहों पर लोगों को लगता है कि 'बदलाव' ही एकमात्र रास्ता है।
अब आगे क्या होने वाला है?
आरक्षण की स्थिति साफ़ होने के बाद अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। अब किसी भी वक्त चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। फिलहाल, प्रत्याशी अब अपने वार्डों और मोहल्लों में घर-घर जाकर हाथ जोड़ना और आशीर्वाद लेना शुरू कर चुके हैं।
अगर आप भी अपनी सीट की सही स्थिति जानना चाहते हैं, तो ज़िला प्रशासन द्वारा जारी लिस्ट को ज़रूर चेक कर लें। क्योंकि चुनाव सिर्फ मतदान नहीं होता, यह हमारे शहर के भविष्य की नींव रखने जैसा है।