संसद से सावरकर की फोटो हटाने का सपना हुआ चकनाचूर? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक शब्दों में क्या कह दिया

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News India Live, Digital Desk : अक्सर हम खबरों में सुनते हैं कि कभी किसी मुद्दे को लेकर लोग सड़क पर उतरते हैं, तो कभी उसे लेकर सीधा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा देते हैं। ऐसा ही कुछ हाल ही में वीर सावरकर की तस्वीर को लेकर हुआ। कुछ लोगों की मांग थी कि नए संसद भवन (New Parliament Building) की दीवार से विनायक दामोदर सावरकर यानी वीर सावरकर की तस्वीर हटा दी जाए। लेकिन, देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस पर सुनवाई करने से ही साफ मना कर दिया है।

चलिए, जरा विस्तार से समझते हैं कि आखिर कोर्ट के अंदर हुआ क्या और जजों ने याचिका लेकर आए लोगों से क्या कहा।

मामला क्या था?

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) डाली गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि नई संसद में लगी वीर सावरकर की तस्वीर को वहां से हटा देना चाहिए। उनकी दलील थी कि इसे लेकर उनके पास कुछ आपत्तियां हैं। वो उम्मीद लेकर आए थे कि कोर्ट इस पर कोई कड़ा आदेश देगा और शायद तस्वीर हटाने का हुक्म सुना देगा।

चीफ जस्टिस का दो टूक जवाब

जब यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना और जस्टिस पीवी संजय कुमार की बेंच के सामने आया, तो जजों का रुख एकदम साफ था। उन्होंने मामले में जरा भी पड़ने से इंकार कर दिया।

कोर्ट ने बहुत ही सुलझे हुए और आसान शब्दों में कहा कि देखिए, संसद भवन के अंदर क्या लगेगा और क्या नहीं, किसकी तस्वीर होगी और किसकी नहीं—यह तय करना सुप्रीम कोर्ट का काम नहीं है। यह पूरी तरह से लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) और संसद के कामकाज का मामला है।

CJI खन्ना ने सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा, "हम इस पर कोई आदेश नहीं दे सकते। यह हमारे अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) का मामला नहीं है।" कोर्ट ने यह भी इशारा किया कि न्यायपालिका का काम कानून की रक्षा करना है, न कि यह तय करना कि संसद की दीवारों पर किस महापुरुष की फोटो लटकेगी।

संसद का घर, संसद के नियम

आसान भाषा में समझें तो कोर्ट का कहना यही था कि जैसे आपके घर की दीवार पर किसकी फोटो लगेगी, यह आप तय करते हैं, पड़ोसी नहीं; ठीक वैसे ही संसद एक संवैधानिक संस्था है। वहां के नियम-कायदे और सजावट का जिम्मा लोकसभा स्पीकर और संसद सचिवालय का है। सुप्रीम कोर्ट हर छोटी-बड़ी बात में दखलअंदाजी नहीं कर सकता, जब तक कि उससे किसी कानून का उल्लंघन न हो रहा हो।

याचिकाकर्ता को लौटना पड़ा खाली हाथ

सुप्रीम कोर्ट ने इस जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने से ही इंकार कर दिया और इसे खारिज कर दिया। यानी सावरकर की तस्वीर को लेकर जो भी विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही थी, उसे कोर्ट ने यह कहकर शांत कर दिया कि इस मामले को कानूनी पचड़े में मत घसीटिए।

फिलहाल, नई संसद में वीर सावरकर की तस्वीर अपनी जगह पर वैसे ही लगी रहेगी, और यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका है जो इसे हटवाने के लिए कोर्ट तक दौड़ लगा रहे थे।