झारखंड के विकास को मिलेगी नई उड़ान ,10 नए कॉरिडोर बदलेंगे कनेक्टिविटी की पूरी तस्वीर
News India Live, Digital Desk : झारखंड के बारे में जब भी बात होती है, तो दिमाग में सबसे पहले हमारे खनिज भंडार और पहाड़ी रास्तों की तस्वीरें आती हैं। लेकिन यहाँ के सफर में जो सबसे बड़ी चुनौती रही है, वो है सड़कों का नेटवर्क और कनेक्टिविटी। कभी ट्रैफिक का जाम, तो कभी संकरी सड़कों की परेशानी। लेकिन अब खबर आ रही है कि साल 2026 झारखंड के लिए किसी 'सपनों के साल' जैसा होने वाला है।
क्या है यह 10 कॉरिडोर का प्रोजेक्ट?
सरकार और प्रशासनिक अमले ने जो मास्टरप्लान तैयार किया है, उसके मुताबिक राज्य के अलग-अलग कोनों को जोड़ने के लिए 10 बड़े कॉरिडोर (Corridors) बनाए जाएंगे। यह सिर्फ़ चौड़ी सड़कों का प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि इन्हें 'इकॉनोमिक लाइफलाइन' माना जा रहा है। इन रास्तों के बन जाने से औद्योगिक इलाकों (Industrial hubs) और शहरों के बीच की दूरी कम तो होगी ही, साथ ही समय की भी भारी बचत होगी।
आम जनता को इससे क्या मिलने वाला है?
अक्सर हम सुनते हैं कि बड़े-बड़े हाईवे बन रहे हैं, पर क्या उसका फायदा हमें सीधे मिलता है? बिलकुल मिलेगा।
- सफर होगा आसान: मान लीजिये आप राँची से जमशेदपुर या धनबाद से हजारीबाग की ओर जाते हैं, तो ये नए रास्ते आपकी थकान और पेट्रोल का खर्च दोनों बचाएंगे।
- ज़मीन और बाज़ार की वैल्यू बढ़ेगी: जब भी कहीं बड़ा कॉरिडोर निकलता है, तो उसके आसपास के गाँवों और कस्बों में व्यापार के नए मौके पैदा होते हैं। वहां की ज़मीन की कीमतें बढ़ जाती हैं।
- हज़ारों नौकरियों का रास्ता: इतनी बड़ी सड़कें बनाने के लिए और उसके आसपास नए उद्योग लगाने के लिए हज़ारों हाथों की ज़रूरत होगी। यानी हमारे झारखंड के युवाओं के लिए लोकल स्तर पर काम बढ़ेगा।
कौन-कौन से इलाके जुड़ेंगे?
इन गलियारों का जाल कुछ इस तरह बुना गया है कि संताल परगना से लेकर पलामू और कोल्हान तक, हर महत्वपूर्ण जिला एक-दूसरे से बेहतरीन तरीके से जुड़ जाए। कोशिश यही है कि औद्योगिक माल ढुलाई (Minning Logistics) तेज़ हो, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिले। 2026 का लक्ष्य इसीलिए रखा गया है ताकि काम समय पर पूरा हो और लोगों को इनका फ़ायदा जल्दी मिलना शुरू हो जाए।