आर्मेनिया के बाद अब फ्रांस की बारी? जानिए भारत के पिनाका में ऐसा क्या है जो दुनिया दीवानी हो गई

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News India Live, Digital Desk : एक वक्त था जब हम अपनी फौज के लिए सुई से लेकर तोप तक सब कुछ बाहर से मंगाते थे। लेकिन अब हवा बदल रही है, और वो भी बहुत तेजी से। आज बात हो रही है भारत के उस ब्रह्मास्त्र की, जिसने पहले आर्मेनिया की हिफाजत की और अब दुनिया की महाशक्ति कहे जाने वाले देश, फ्रांस की नजर उस पर टिक गई है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं भारत की शान 'पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर' (Pinaka MBRL) की।

ताज़ा खबर ये है कि अमेरिका की एक बड़ी डिफेंस मैगज़ीन में भारत के इस रॉकेट सिस्टम की खूब चर्चा हो रही है और दावा किया जा रहा है कि फ्रांस अपनी सेना के लिए पिनाका सिस्टम खरीदने में काफी दिलचस्पी दिखा रहा है।

आखिर फ्रांस को इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?

अब आप सोचेंगे कि फ्रांस तो खुद राफेल जैसे लड़ाकू विमान बनाता है, उसे हमारे रॉकेट की क्या ज़रूरत? मामला थोड़ा पेचीदा है। दरअसल, फ्रांस की आर्मी अभी तक अमेरिका का बना M270 रॉकेट सिस्टम इस्तेमाल करती आ रही है। लेकिन ये सिस्टम अब काफी पुराने हो चुके हैं। खबर है कि फ्रांस इन्हें बदलने के लिए एक ऐसे साथी की तलाश में है जो आधुनिक भी हो और जिसकी मार भी अचूक हो।

यहीं पर एंट्री होती है भारत के Pinaka Multi-Barrel Rocket Launcher की। हाल ही में एक अमेरिकी रिपोर्ट में यह हिंट मिला है कि फ्रांस की सेना जल्द ही पिनाका का 'गाइडेड वर्जन' खरीदने के लिए भारत से हाथ मिला सकती है। अगर यह डील पक्की होती है, तो यह भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए किसी दीवाली से कम नहीं होगा।

क्या है 'पिनाका' की खासियत? (Pinaka Rocket LRGR 120)

चलिए, अब आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर इस 'LRGR 120' या पिनाका में ऐसा क्या खास है। पिनाका का नाम भगवान शिव के धनुष 'पिनाक' पर रखा गया है, और काम भी यह बिल्कुल वैसा ही करता है—दुश्मन का विनाश।

इसकी सबसे बड़ी खूबी है इसका "मल्टी-बैरल" होना। यानी एक ही गाड़ी पर कई सारे रॉकेट लदे होते हैं। यह सिस्टम पलक झपकते ही, यानी सिर्फ 44 सेकंड के अंदर 12 खूंखार रॉकेट दुश्मन के इलाके में दाग सकता है। सोचिए, एक मिनट से भी कम समय में दुश्मन के खेमे में तबाही मच सकती है।

जिस वर्जन की चर्चा अभी हो रही है, वह है इसका गाइडेड रॉकेट वेरिएंट। पुराने रॉकेट सिर्फ सीधे जाते थे, लेकिन यह गाइडेड पिनाका दुश्मन के ठिकाने को लॉक करके बिल्कुल सटीक निशाना लगाता है। चाहे वो पहाड़ों के पीछे छिपा बंकर हो या चलता हुआ टैंक, इसका बचना नामुमकिन है।

HIMARS से सस्ता और टिकाऊ

आपने यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिकी सिस्टम HIMARS का नाम खूब सुना होगा। पिनाका लगभग उसी टक्कर का सिस्टम है, लेकिन सबसे बड़ी बात—यह उससे कहीं ज्यादा सस्ता है। फ्रांस को यही बात सबसे ज्यादा भा रही है। एक तो तकनीक अव्वल दर्जे की, ऊपर से 'किफायती दाम'। डीआरडीओ (DRDO) ने इसे ऐसा बनाया है कि इसे कहीं भी ले जाना और तैनात करना बेहद आसान है।

आर्मेनिया ने पहले ही दिखाई राह

ऐसा नहीं है कि फ्रांस पहला देश है। इससे पहले आर्मेनिया, जो खुद जंग के हालात में था, उसने भारत से पिनाका रॉकेट सिस्टम खरीदा था और रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वहां बेहद सफल साबित हुआ। आर्मेनिया की इस डील ने पूरी दुनिया का भरोसा भारतीय हथियारों पर बढ़ा दिया है।