तनाव और चिप्स का वो क्रंची रिश्ता क्या आप जानते हैं ,टेंशन में हमारा दिमाग कुरकुरा ही क्यों ढूंढता है?

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News India Live, Digital Desk : जब हम बहुत ज़्यादा स्ट्रेस या बेचैनी में होते हैं, तो हमारे शरीर के साथ-साथ हमारा दिमाग भी 'रिलैक्स' होने का कोई ज़रिया ढूँढता है। शोध बताते हैं कि जब हम कोई कुरकुरी या सख्त चीज़ (जैसे मूंगफली, मखाना या चिप्स) दांतों के नीचे ज़ोर से दबाते हैं, तो यह हमारे जबड़े की मांसपेशियों को एक तरह की एक्सरसाइज कराता है।

जबड़े की कसरत और दिमाग का सुकून
दरअसल, जब हम गुस्से या तनाव में होते हैं, तो अनजाने में हमारे जबड़े सख्त हो जाते हैं और हम दांत पीसने लगते हैं। ऐसे में कुछ कड़क चबाना हमारे जबड़ों के ज़रिए उस दबी हुई टेंशन को बाहर निकालने का काम करता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी स्ट्रेस बॉल (Stress Ball) को हाथ से दबाना। दांतों से कुछ 'क्रंच' करने पर दिमाग को जो वाइब्रेशन और सिग्नल मिलते हैं, वह थोड़ी देर के लिए एंग्जायटी को शांत कर देते हैं।

आवाज़ का जादू: डिस्ट्रैक्शन का तरीका
एक दिलचस्प बात यह भी है कि जब हम कुछ कुरकुरा खाते हैं, तो जो आवाज़ पैदा होती है (वो 'कड़क-चट' की साउंड), वह हमारे कानों के ज़रिए दिमाग को एक संदेश देती है। यह आवाज़ हमारे लिए 'डिस्ट्रैक्शन' (ध्यान भटकाने वाला माध्यम) बन जाती है। उस पल हमारा दिमाग टेंशन वाली बात से हटकर उस आवाज़ और स्वाद पर केंद्रित हो जाता है। यही वजह है कि स्ट्रेस ईटिंग में लोग सॉफ्ट केक या आइसक्रीम से ज़्यादा 'क्रिस्पी' चीज़ें पसंद करते हैं।

लेकिन यहाँ सावधानी भी ज़रूरी है
अब समस्या यह है कि इस चक्कर में हम अनजाने में ढेर सारा जंक फूड और ट्रांस-फैट खा लेते हैं। स्ट्रेस कम करने का ये तरीका सेहत पर भारी पड़ सकता है। अगर आप भी तनाव में 'क्रंची' चीज़ें खाना चाहते हैं, तो चिप्स की जगह भुने हुए चने, मखाने, गाजर, या थोड़े से ड्राई फ्रूट्स खाएं। इससे आपके जबड़े की मांसपेशियों को वो सुकून भी मिल जाएगा और आपका वज़न भी नहीं बढ़ेगा।

अगली बार जब आपका मन अचानक चिप्स का पैकेट खोलने का करे, तो एक पल रुककर सोचिएगा कि कहीं आप सच में भूखे हैं या बस आपका दिमाग थोड़ा रिलैक्स होना चाह रहा है?