हांगकांग का वो ब्लैक डे 128 मौतों का हिसाब मांगने पुलिस ने कसी कमर, 8 और चेहरे बेनकाब

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News India Live, Digital Desk : कभी-कभी मुनाफा कमाने का लालच इंसान को किस हद तक ले जा सकता है, हांगकांग का हालिया अग्निकांड इसकी एक भयानक मिसाल है। कुछ ही दिन पहले वहां के 'ताइ पो' इलाके की एक बहुमंजिला इमारत में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। सोचिए, अपने घरों में सुकून से सो रहे लोगों को अंदाजा भी नहीं था कि बाहर लगी रिनोवेशन की मचान (Scaffolding) ही उनकी चिता बन जाएगी। इस हादसे में 128 बेगुनाह लोग जिंदा जल गए।

अब इस मामले में प्रशासन नींद से जागा है और बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। ताजा खबर यह है कि पुलिस ने 8 और लोगों को गिरफ्तार किया है। और यकीन मानिए, इनकी लापरवाही की कहानी सुनकर आप भी सन्न रह जाएंगे।

क्यों हुई ये नई गिरफ्तारियां?
पुलिस ने जिन 8 नए लोगों को पकड़ा है, उनमें रेनोवेशन कंपनी के बड़े अधिकारी, इंजीनियर और ठेकेदार शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में लोग रह रहे थे, उसकी मरम्मत के नाम पर मौत का सामान लगाया जा रहा था। बिल्डिंग को बाहर से जिन जालों और बांस की मचानों से ढका गया था, उनमें बेहद ज्वलनशील (flammable) प्लास्टिक और फोम का इस्तेमाल हुआ था।

सीधे शब्दों में कहें तो पूरी बिल्डिंग को एक तरह से 'माचिस की डिब्बी' बना दिया गया था। एक चिंगारी भड़की और देखते ही देखते उसने 4000 लोगों के आशियाने को नरक में बदल दिया।

42 घंटे तक तांडव और 'खामोश' सायरन
हैरानी की बात यह है कि जब आग लगी, तो बिल्डिंग का फायर अलार्म सिस्टम बजा ही नहीं! सोचिए उस मंजर को—धुआं कमरों में भर रहा था और लोगों को पता ही नहीं था कि भागना किधर है। आग बुझाने में 40 घंटे से ज्यादा का वक्त लगा। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 128 लोग मारे जा चुके थे, और दुख की बात यह है कि 200 के करीब लोग अब भी लापता हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। परिवार वाले अब भी अस्पतालों और मलबे के ढेर के पास अपनों की एक झलक पाने को तरस रहे हैं।

सिर्फ हादसा नहीं, इसे हत्या कहिए
जांच एजेंसियां अब इसे महज एक दुर्घटना नहीं मान रहीं। गिरफ्तार किए गए लोगों पर आरोप है कि उन्होंने सस्ते मटेरियल के चक्कर में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा दीं। खिड़कियों को प्लास्टिक बोर्ड्स से ढक दिया गया था, जिससे धुआं बाहर निकल ही नहीं पाया और दम घुटने से कइयों ने दम तोड़ दिया। यह गिरफ्तारी उन परिवारों के लिए शायद बहुत छोटी तसल्ली है, जिन्होंने अपने बच्चों, बुजुर्गों और जीवनसाथी को हमेशा के लिए खो दिया।

सबक हम सब के लिए
यह खबर हांगकांग की है, लेकिन सवाल हमारे लिए भी खड़ा करती है। हम जिन ऊंची इमारतों में रहते हैं, क्या वहां आग लगने पर बचने का कोई रास्ता है? क्या रिनोवेशन के नाम पर हमारी सुरक्षा से भी समझौता तो नहीं हो रहा? हांगकांग का यह दर्दनाक हादसा हमें याद दिलाता है कि सुरक्षा से की गई जरा सी चूक कितनी भारी पड़ सकती है।