Teej festival : कजरी तीज पर कैसे करें शिव पार्वती को प्रसन्न, ये है पूरी पूजन विधि और शुभ समय
- by Archana
- 2025-08-12 11:24:00
Newsindia live,Digital Desk: सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाने वाला कजरी तीज का व्रत इस वर्ष मंगलवार, 12 अगस्त 2025 को रखा जाएगा. इसे बड़ी तीज या सातुड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं.
पूजा का शुभ मुहूर्त
साल 2025 में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 11 अगस्त को शाम 4 बजकर 8 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 12 अगस्त को शाम 6 बजकर 26 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, कजरी तीज का व्रत 12 अगस्त को ही रखना शास्त्र सम्मत है. इस दिन पूजा के लिए सुबह का मुहूर्त 9 बजकर 31 मिनट से लेकर 11 बजकर 9 मिनट तक रहेगा, जबकि दोपहर में 12 बजकर 47 मिनट से 2 बजकर 25 मिनट तक भी पूजा की जा सकती है.
पूजा की सामग्री
कजरी तीज की पूजा के लिए कुछ विशेष सामग्रियों की आवश्यकता होती है. इनमें गाय का कच्चा दूध, दीपक, अगरबत्ती, अक्षत, फल, फूल, नीम की डाली, सत्तू, गुड़, घी, मेंहदी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, चुनरी और सोलह श्रृंगार की अन्य वस्तुएं शामिल हैं. पूजा के लिए मिट्टी से बने शिव-पार्वती और गणेश की मूर्ति या चित्र का भी प्रबंध कर लें.
संपूर्ण पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें. फिर मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियां बनाएं या बाजार से लाई हुई मूर्ति को पूजा की चौकी पर स्थापित करें. इसके बाद माता पार्वती को सुहाग की सभी वस्तुएं अर्पित करें, जिनमें चुनरी, मेंहदी, सिंदूर और चूड़ियां प्रमुख हैं. भगवान शिव को बेलपत्र और गाय का दूध चढ़ाएं. इसके बाद गणेश जी की पूजा करें और उन्हें दूर्वा अर्पित करें. धूप-दीप जलाकर कजरी तीज की कथा सुनें या पढ़ें और अंत में आरती करें. दिन भर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है.
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