Team India : उम्र नहीं, फॉर्म देखो , कोहली और रोहित की वनडे वापसी पर बोले दीप दासगुप्ता
News India Live, Digital Desk: क्या विराट कोहली और रोहित शर्मा को 2027 का वनडे वर्ल्ड कप खेलना चाहिए? T20 और टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह चुके इन दो दिग्गजों के 50 ओवर के भविष्य को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. इसी बहस के बीच, पूर्व भारतीय क्रिकेटर और मौजूदा कमेंटेटर दीप दासगुप्ता ने एक बड़ी और सीधी बात कही है. उनका मानना है कि टीम में चयन का आधार उम्र नहीं, बल्कि खिलाड़ी का प्रदर्शन और फिटनेस होना चाहिए.
"कोई उन्हें बताने वाला कौन होता है कि कब रुकना है?"
दीप दासगुप्ता ने साफ कहा कि रोहित और विराट को कब संन्यास लेना है, यह तय करने का हक किसी और को नहीं है. उन्होंने कहा, “किसी को यह अधिकार नहीं है कि वो उन्हें बताए कि कब रुकना है. जब उन्हें लगेगा, वो खुद रुक जाएंगे. यह पूरी तरह से उनका अपना फैसला है.” दासगुप्ता का मानना है कि जब तक ये दोनों खिलाड़ी प्रदर्शन कर रहे हैं और फिट हैं, उन्हें टीम में मौका मिलना चाहिए. उन्होंने रोहित शर्मा की हालिया फिटनेस की तारीफ करते हुए कहा, "मैंने रोहित की तस्वीरें देखीं, वह फिट दिख रहे हैं और आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार हैं.
लगातार क्रिकेट खेलना है बड़ी चुनौती
दासगुप्ता और अन्य क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रोहित और विराट के लिए सबसे बड़ी चुनौती लगातार मैच खेलते रहना होगी. अब जब वे सिर्फ वनडे फॉर्मेट ही खेलेंगे, तो उन्हें मैच प्रैक्टिस कम मिलेगी. इसी को ध्यान में रखते हुए दासगुप्ता ने एक दिलचस्प सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों को मैच फिट रहने के लिए भारत में विजय हजारे ट्रॉफी के साथ-साथ इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया या साउथ अफ्रीका जैसे देशों में घरेलू 50 ओवर के टूर्नामेंट खेलने पर भी विचार करना चाहिए
अनुभव का कोई तोड़ नहीं
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब भारत अगले वनडे वर्ल्ड कप के लिए टीम तैयार करने की सोच रहा है. चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत में इन दोनों खिलाड़ियों ने अहम भूमिका निभाई थी.कई जानकारों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों को मौका देना जरूरी है, लेकिन रोहित और विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम को स्थिरता और नेतृत्व प्रदान करती है, खासकर बड़े और दबाव वाले मैचों में.
दीप दासगुप्ता की बातें एक चीज साफ करती हैं - भारतीय क्रिकेट के इन दो महान खिलाड़ियों का भविष्य उनकी उम्र के आंकड़ों से नहीं, बल्कि मैदान पर उनके प्रदर्शन, जुनून और फिटनेस से तय होगा.