मिठाई, दीये, रिश्तेदार... सब पुराना हुआ? इस दिवाली भारतीय घर नहीं, अपना बैग पैक कर रहे हैं!

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एक जमाना था जब त्योहारों, खासकर दशहरा-दिवाली का मतलब होता था - घर की महीनों तक चलने वाली सफाई, ढेर सारी मिठाइयां बनाना, नए कपड़े खरीदना और रिश्तेदारों के घर-घर जाकर तोहफे बांटना। लेकिन अब यह ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। आज का भारतीय त्योहारों पर काम का बोझ नहीं, बल्कि सुकून और नई यादें चाहता है। और इसीलिए, अब त्योहारों पर घर नहीं, बल्कि होटल और फ्लाइट्स बुक हो रही हैं!

ट्रैवल कंपनियों के मुताबिक, इस फेस्टिव सीजन में घूमने-फिरने की मांग में इतना बड़ा उछाल आया है जो पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाला है। लोग अब दशहरा-दिवाली की छुट्टियों को सिर्फ एक छुट्टी की तरह नहीं, बल्कि एक शानदार 'वेकेशन' के मौके की तरह देख रहे हैं।

क्यों आया है यह बड़ा बदलाव?

इस नए 'ट्रैवल वाले त्योहार' के ट्रेंड के पीछे कई बड़ी वजहें हैं:

  • यादें बनाने पर जोर:अब लोग चीजें खरीदने से ज्यादा, अनुभव बटोरने और यादें बनाने में यकीन करने लगे हैं। उन्हें लगता है कि घर पर रहकर वही रूटीन फॉलो करने से बेहतर है कि कहीं नई जगह घूमा जाए।
  • सोशल मीडिया का असर:इंस्टाग्राम और फेसबुक पर दोस्तों की खूबसूरत वेकेशन की तस्वीरें देखकर हर किसी का मन ललचाता है। हर कोई अपनी 'इंस्टाग्राम वाली परफेक्ट छुट्टी' चाहता है।
  • बढ़ती इनकम, बदलती सोच: मिडिल क्लास की बढ़ती कमाई और नई सोच ने भी इस ट्रेंड को हवा दी है। अब लोग घूमने-फिरने पर पैसा खर्च करने को बर्बादी नहीं, बल्कि खुद पर किया गया एक निवेश मानते हैं।

कहां जा रहे हैं भारतीय? (देश से लेकर दुबई तक, सब कुछ है लिस्ट में)

दिलचस्प बात यह है कि लोग सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेश घूमने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं।

  • देश में धूम:भारत के अंदर, लोगों की पहली पसंद राजस्थान के शाही किले (जयपुर, उदयपुर), गोवा के खूबसूरत बीच और केरल के शांत बैकवॉटर्स बने हुए हैं। इसके अलावा, त्योहारों पर एक आध्यात्मिक अनुभव के लिए वाराणसी और ऋषिकेश जैसे शहर भी हॉट फेवरेट हैं।
  • पड़ोसी देशों की सैर:विदेश यात्रा में, कम दूरी वाले और बजट-फ्रेंडली देश टॉप पर हैं। दुबई, थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम की मांग सबसे ज्यादा है। 4-5 दिन की छुट्टी में इन देशों की यात्रा आसानी से हो जाती है।

यह ट्रेंड सिर्फ घूमने-फिरने का नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि अब भारतीय त्योहारों को मनाने की परिभाषा बदल रही है। यह अब सिर्फ एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पर्सनल खुशी और खुद को रिचार्ज करने का एक मौका बन गया है। तो अगली बार जब दिवाली आए, तो शायद आप मिठाई का डिब्बा नहीं, बल्कि अपना सूटकेस पैक कर रहे हों!