गिरफ्तारी हुई तो नहीं करेंगे विरोध यौन शोषण के आरोपों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान

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News India Live, Digital Desk : प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। सोमवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि वे कानून का सम्मान करते हैं और यदि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने आती है, तो वे किसी भी तरह का विरोध नहीं करेंगे, बल्कि पूरा सहयोग करेंगे।

स्वामी जी के बयान की 3 बड़ी बातें:

'तीन अदालतों पर भरोसा': स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उन्हें तीन अदालतों पर अटूट विश्वास है जनता की अदालत (जो सब देख रही है), उनके अपने हृदय की अदालत (जो उन्हें निर्दोष मानती है) और भगवान की अदालत। उन्होंने दावा किया कि उन्हें इन तीनों से 'क्लीन चिट' मिल चुकी है।

गैर-भाजपा शासित राज्य से जांच की मांग: यूपी पुलिस की निष्पक्षता पर अविश्वास जताते हुए स्वामी जी ने मांग की है कि इस संवेदनशील मामले की जांच किसी ऐसे राज्य की पुलिस से कराई जाए जहाँ भाजपा की सरकार न हो। उन्होंने इसे अपनी 'गौ हत्या मुक्त भारत' की मुहिम को दबाने की साजिश करार दिया।

CCTV और साक्ष्यों का हवाला: उन्होंने सवाल उठाया कि माघ मेले के दौरान वे लगातार सीसीटीवी कैमरों और मीडिया की निगरानी में थे, फिर ऐसी घटना कैसे संभव है? उन्होंने शिकायतकर्ता के चरित्र पर भी सवाल उठाते हुए उन्हें 'हिस्ट्रीशीटर' बताया।

क्या है पूरा विवाद? (The Controversy)

प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया था।

आरोप: आरोप है कि 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच प्रयागराज माघ मेले और अन्य शिविरों में दो नाबालिग शिष्यों के साथ यौन दुर्व्यवहार किया गया।

धाराएं: पुलिस ने बीएनएस (BNS) की धारा 351(3) और पॉक्सो एक्ट की धारा 3, 4(2), 6, 16 और 17 के तहत मामला दर्ज किया है।

प्रशासनिक हलचल

वाराणसी और प्रयागराज पुलिस अलर्ट पर है। डीसीपी के नेतृत्व में एक 5 सदस्यीय स्पेशल टीम का गठन किया गया है जो साक्ष्य जुटा रही है। वहीं, स्वामी जी के समर्थकों ने इसे 'सनातन धर्म पर हमला' बताते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।