बंगाल में बड़ा खेला सुवेंदु ने खोल दी सीक्रेट फाइल, ममता सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
News India Live, Digital Desk : आप तो जानते ही हैं कि पश्चिम बंगाल में 'खेला' कभी खत्म नहीं होता। आए दिन तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जुबानी जंग चलती रहती है। लेकिन इस बार मामला थोड़ा गंभीर हो गया है। विपक्ष के नेता यानी Suvendu Adhikari ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है, और इस बार उनकी रडार पर सीधे मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनका प्रशासन है।
सुवेंदु ने सिर्फ बयान नहीं दिया है, बल्कि देश की सबसे बड़ी चुनावी संस्था, Election Commission (चुनाव आयोग) को एक चिट्ठी लिख डाली है। और भाई साहब, इस चिट्ठी का सब्जेक्ट कोई छोटा-मोटा नहीं, बल्कि एक 'स्कैम' है। जी हाँ, सुवेंदु का कहना है कि बंगाल में 'SIR' के नाम पर बड़ा 'SCAM' चल रहा है।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर माजरा क्या है? चलिए, आपको आसान भाषा में पूरा किस्सा समझाते हैं।
क्या है ये 'SIR' वाला स्कैम?
दरअसल, अभी बंगाल में मतदाता सूची (Voter List) को अपडेट करने का काम चल रहा है। इसे तकनीकी भाषा में Special Intensive Revision (SIR) कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो वोटर्स के नाम जोड़ना और हटाना। सुवेंदु अधिकारी का आरोप है कि इसी प्रोसेस की आड़ में एक बहुत बड़ा घोटाला यानी 'Voter List Scam' हो रहा है।
उन्होंने चुनाव आयोग को लिखी अपनी चिट्ठी में साफ-साफ कहा है कि राज्य सरकार की मशीनरी का इस्तेमाल करके रोहिंग्या (Rohingyas) और बांग्लादेशी घुसपैठियों (Bangladeshi Infiltrators) के नाम धड़ल्ले से वोटर लिस्ट में जोड़े जा रहे हैं।
ममता सरकार पर सीधा निशाना
सुवेंदु यही नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि इस काम में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पूरी तरह से मिले हुए हैं। उनका कहना है कि 'निष्पक्षता' तो दूर की बात है, अधिकारी एक तरह से TMC के कार्यकर्ताओं की तरह काम कर रहे हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर भी काफी तल्ख तेवर दिखाए हैं। उनका कहना है, "मैंने चुनाव आयोग को बता दिया है कि यहाँ SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) नहीं, बल्कि एक सुनियोजित Scam चल रहा है।" सुवेंदु को डर है कि अगर फर्जी वोटर्स की यह फौज लिस्ट में शामिल हो गई, तो आने वाले 2026 के विधानसभा चुनाव (2026 Assembly Polls) में निष्पक्ष चुनाव कराना नामुमकिन हो जाएगा।
दिल्ली तक पहुंची शिकायत
बीजेपी नेता ने मांग की है कि चुनाव आयोग तुरंत दखल दे और देखे कि बंगाल के सीमावर्ती जिलों (Border Districts) में अचानक नए वोटर्स की संख्या इतनी तेजी से कैसे बढ़ रही है? क्या ये जेन्युइन हैं या फिर वोट बैंक पॉलिटिक्स का हिस्सा?
यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि West Bengal Politics में 'बाहरी बनाम भीतरी' और घुसपैठ का मुद्दा हमेशा गरमाया रहता है। बीजेपी का पुराना आरोप रहा है कि ममता बनर्जी की पार्टी अपनी सत्ता बचाने के लिए अवैध प्रवासियों का इस्तेमाल करती है, जिसे टीएमसी हमेशा खारिज करती आई है।
आगे क्या होगा?
अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। अगर आयोग सुवेंदु के आरोपों को गंभीरता से लेता है, तो राज्य के कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है और वोटर लिस्ट की जांच कड़ी हो सकती है। लेकिन एक बात तो तय है, दोस्तों—जैसे-जैसे चुनाव पास आएंगे, बंगाल का सियासी पारा ऐसे ही चढ़ता रहेगा।
आपकी इस पर क्या राय है? क्या आपको भी लगता है कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हो रही है? कमेंट करके जरूर बताएं!