Sutak Period 2026 : सूतक काल शुरू होते ही बंद हुए अयोध्या, काशी और मथुरा के कपाट; जानें आपके शहर में अब कब खुलेंगे मंदिरों के पट
News India Live, Digital Desk : हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण और सूतक काल का विशेष महत्व माना गया है। आज 3 मार्च 2026 को पड़ने वाले खगोलीय घटनाक्रम के चलते देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की पूजा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए अयोध्या के भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और मथुरा के बांके बिहारी मंदिर सहित उत्तर प्रदेश के तमाम प्रमुख देवालयों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। सूतक काल के दौरान मूर्तियों के स्पर्श और भोग लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
1. सूतक काल का समय और धार्मिक पाबंदियां (Sutak Period Rules)
शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण लगने से एक निश्चित समय पहले सूतक काल प्रभावी हो जाता है, जिसे 'अशौच' का समय माना जाता है।
मंदिरों की तालाबंदी: इस अवधि में मंदिरों के गर्भगृह में प्रवेश वर्जित होता है।
पूजा-पाठ पर रोक: सूतक काल के दौरान न तो भगवान की मूर्ति को छुआ जाता है और न ही किसी प्रकार की विशेष आरती या अनुष्ठान किया जाता है। यही कारण है कि आज सुबह से ही भक्तों के लिए दर्शन रोक दिए गए हैं।
2. अयोध्या राम मंदिर: रामलला के दर्शन का नया शेड्यूल (Ayodhya Darshan Update)
अयोध्या में रामलला के दरबार में भी सूतक काल का कड़ा पालन किया जा रहा है।
परिवर्तन: राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, ग्रहण की अवधि समाप्त होने तक रामलला पर्दे के पीछे रहेंगे।
शुद्धिकरण: ग्रहण खत्म होते ही पूरे मंदिर परिसर को सरयू जल से धोकर शुद्ध किया जाएगा। इसके बाद रामलला का विशेष अभिषेक होगा और फिर शाम की आरती के साथ भक्तों को प्रवेश दिया जाएगा।
3. काशी और मथुरा में शुद्धिकरण की तैयारी (Kashi & Mathura Temple News)
वाराणसी: बाबा विश्वनाथ के मंदिर में सूतक काल लगते ही वीआईपी और सामान्य दर्शन रोक दिए गए हैं। ग्रहण के मोक्ष (समाप्त) होने के बाद गंगा जल से बाबा का जलाभिषेक होगा, जिसके बाद ही भक्त दर्शन कर पाएंगे।
मथुरा-वृंदावन: बांके बिहारी और द्वारकाधीश मंदिर में भी ठाकुर जी के पट बंद कर दिए गए हैं। यहाँ सेवायतों द्वारा ग्रहण के बाद विशेष 'शुद्धिकरण आरती' की जाएगी, तभी ब्रज में दर्शन का सिलसिला दोबारा शुरू होगा।
4. ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें? (Do's and Don'ts)
सूतक काल और ग्रहण के समय श्रद्धालुओं को कुछ खास नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है:
तुलसी दल का प्रयोग: खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डालना अनिवार्य माना गया है।
मंत्र जाप: इस समय को मानसिक शांति और इष्ट देव के मंत्रों के जाप के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
दान का महत्व: ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र नदियों में स्नान और सामर्थ्य अनुसार दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
5. कब खुलेंगे मंदिरों के पट? (Darshan Reopening Time)
खगोलीय गणना के अनुसार, ग्रहण की समाप्ति के बाद आज शाम को सभी प्रमुख मंदिरों की सफाई और शुद्धिकरण का कार्य किया जाएगा। अनुमान है कि शाम 6:30 बजे के बाद सभी प्रमुख शहरों में नियमित दर्शन और संध्या आरती शुरू हो जाएगी। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे मंदिर जाने से पहले स्थानीय समय और भीड़ की स्थिति की जांच जरूर कर लें।