DMK-Congress Rift : तमिलनाडु में टूटा इंडिया गठबंधन? DMK ने कांग्रेस को दिया अल्टीमेटम 25 सीटें लेनी हैं तो लो, वरना रास्ता नापो
News India Live, Digital Desk: तमिलनाडु की सियासत में दशकों पुराने दोस्तों DMK और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर 'महायुद्ध' छिड़ गया है। DMK ने कांग्रेस को साफ़ कर दिया है कि वह उसे 25 विधानसभा सीटों और 1 राज्यसभा सीट से ज्यादा नहीं दे सकती। सूत्रों का कहना है कि DMK ने कांग्रेस हाईकमान को 3 मार्च 2026 की डेडलाइन दी थी कि वे इस ऑफर को स्वीकार करें या अपना रास्ता चुनें।
1. 25 बनाम 45: सीटों पर फंसा है पेच (The Seat Deadlock)
विवाद की मुख्य जड़ सीटों की संख्या है। कांग्रेस इस बार गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।
कांग्रेस की मांग: कांग्रेस कम से कम 34 से 45 सीटों की मांग कर रही है। उनका तर्क है कि राज्य में उनकी स्थिति मजबूत हुई है और वे 2021 की तुलना में (जब उन्हें 25 सीटें मिली थीं) अधिक सीटों के हकदार हैं।
DMK का स्टैंड: मुख्यमंत्री स्टालिन का कहना है कि इस बार गठबंधन में DMDK, MNM और कई अन्य छोटे दल शामिल हुए हैं, जिन्हें सीटें आवंटित करनी हैं। ऐसे में कांग्रेस को पिछली बार से अधिक सीटें देना असंभव है।
2. राज्यसभा सीट और 'डेडलाइन' का दबाव (Rajya Sabha Factor)
DMK के इस सख्त रुख के पीछे राज्यसभा चुनाव भी एक बड़ी वजह है।
5 मार्च की डेडलाइन: तमिलनाडु में राज्यसभा की 6 सीटों के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च 2026 है।
अल्टीमेटम: DMK चाहती थी कि कांग्रेस 3 मार्च तक अपना फैसला सुना दे ताकि राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम तय किए जा सकें। यदि कांग्रेस समझौता नहीं करती है, तो DMK अपनी रिक्त सीटें अन्य सहयोगियों को दे सकती है।
3. क्या विजय की TVK से हाथ मिलाएगी कांग्रेस? (The TVK Threat)
कांग्रेस की इस 'हठ' के पीछे एक रणनीतिक दांव भी माना जा रहा है।
बार्गेनिंग चिप: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK (Tamilaga Vettri Kazhagam) के साथ भी संपर्क में है।
DMK की नाराजगी: कांग्रेस द्वारा TVK को एक 'बार्गेनिंग चिप' (दबाव बनाने का जरिया) की तरह इस्तेमाल करने से DMK नेतृत्व काफी नाराज है।
4. पी. चिदंबरम की एंट्री: सुलह की आखिरी कोशिश (Backchannel Talks)
तनाव बढ़ता देख कांग्रेस हाईकमान ने अनुभवी नेता पी. चिदंबरम को मैदान में उतारा है।
मुलाकात: मंगलवार (3 मार्च) को चिदंबरम ने मुख्यमंत्री स्टालिन के आवास पर जाकर उनसे लंबी बातचीत की है।
सोनिया गांधी का रुख: सूत्रों के अनुसार, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे गठबंधन को बचाए रखने के पक्ष में हैं, जबकि राहुल गांधी और स्थानीय नेता अधिक सम्मानजनक सीटों की मांग पर अड़े हैं।
5. गठबंधन टूटने का क्या होगा असर? (Impact of Breakup)
अगर यह गठबंधन टूटता है, तो इसके नतीजे काफी दूरगामी हो सकते हैं:
वोटों का बंटवारा: कांग्रेस का अलग होना DMK के लिए एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को बढ़ा सकता है।
विपक्ष को फायदा: AIADMK और BJP इस फूट का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। ईसाई और मुस्लिम वोट बैंक, जो पारंपरिक रूप से इस गठबंधन के साथ रहा है, भ्रमित हो सकता है।