CAA पर सुप्रीम फैसला करीब 5 मई को होगी आखिरी सुनवाई, क्या मोदी सरकार का नागरिकता कानून टिक पाएगा अदालत में
News India Live, Digital Desk: नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर पिछले कई वर्षों से चल रही कानूनी जंग अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 200 से अधिक याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के लिए 5 मई 2026 की तारीख मुकर्रर की है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ यह तय करेगी कि क्या यह कानून भारतीय संविधान के मूल ढांचे और समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है या नहीं।
क्या है विवाद की मुख्य जड़?
CAA कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।
विपक्ष का तर्क: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है क्योंकि इसमें मुस्लिम समुदाय को शामिल नहीं किया गया है।
सरकार का पक्ष: केंद्र सरकार का तर्क है कि यह कानून नागरिकता छीनने के लिए नहीं बल्कि प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है और यह पूरी तरह संवैधानिक है।
5 मई की सुनवाई क्यों है खास?
अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब दलीलों का दौर खत्म होने वाला है। 5 मई को होने वाली सुनवाई 'फाइनल हियरिंग' होगी, जिसमें सभी पक्ष अपनी अंतिम दलीलें पेश करेंगे।
नोडल वकील की नियुक्ति: कोर्ट ने पहले ही सुचारू सुनवाई के लिए नोडल वकील नियुक्त किए हैं ताकि सैकड़ों याचिकाओं को व्यवस्थित तरीके से सुना जा सके।
असम और त्रिपुरा का विशेष संदर्भ: असम और त्रिपुरा से जुड़ी याचिकाओं पर अलग से ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि वहां की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय स्थिति बाकी भारत से अलग है।
पूरे देश की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर
2019 में पारित होने के बाद से ही CAA देश भर में विरोध प्रदर्शनों और चर्चाओं का केंद्र रहा है। गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में इसके नियम (Rules) अधिसूचित किए जाने के बाद से कानूनी चुनौती और भी गंभीर हो गई है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल करोड़ों प्रवासियों का भविष्य तय करेगा, बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा भी बदल सकता है।