Holashtak 2026 : होलाष्टक में शुरू करें ये 5 अचूक उपाय, घर से दूर होगी हर नकारात्मक शक्ति बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा
News India Live, Digital Desk : हिंदू धर्म में होली से ठीक 8 दिन पहले का समय 'होलाष्टक' कहलाता है। साल 2026 में होलाष्टक 23 फरवरी से शुरू होकर 2 मार्च (होलिका दहन) तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन आठ दिनों में ग्रह उग्र स्वभाव में होते हैं, इसलिए कोई भी मांगलिक कार्य (शादी, मुंडन, गृह प्रवेश) नहीं किया जाता। लेकिन, नकारात्मकता को खत्म करने और सोए हुए भाग्य को जगाने के लिए यह समय साधना और उपायों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
नकारात्मकता दूर करने के 5 प्रभावी उपाय
यदि आपके घर में क्लेश रहता है, काम बिगड़ रहे हैं या भारीपन महसूस होता है, तो होलाष्टक के दौरान ये उपाय जरूर करें:
गंगाजल और कपूर का छिड़काव: होलाष्टक के पहले दिन से रोजाना सुबह स्नान के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। शाम को पीली सरसों और कपूर जलाकर उसका धुआं पूरे घर में दिखाएं। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
हनुमान चालीसा का पाठ: इन 8 दिनों में ग्रहों के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए प्रतिदिन 'हनुमान चालीसा' या 'बजरंग बाण' का पाठ करें। हनुमान जी की पूजा से नकारात्मक शक्तियां घर के आसपास भी नहीं भटकतीं।
आर्थिक तंगी दूर करने के लिए: होलाष्टक के दौरान किसी भी दिन घर के मुख्य द्वार पर गुलाल से 'ॐ' या 'स्वास्तिक' का चिह्न बनाएं। इसके साथ ही देवी लक्ष्मी को गुलाब का फूल अर्पित करें। माना जाता है कि इससे धन आगमन के रास्ते खुलते हैं।
अशोक के पत्तों का वंदनवार: होलाष्टक शुरू होते ही अपने घर के मुख्य दरवाजे पर अशोक के पत्तों का वंदनवार (तोरण) लगाएं। यह घर में प्रवेश करने वाली बुरी शक्तियों को रोकने का एक प्राचीन और प्रभावी तरीका है।
दान का महत्व: होलाष्टक के दौरान अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को गुड़, अनाज, तिल और वस्त्र का दान करें। इन दिनों में किया गया दान कष्टों को हरने वाला माना जाता है।
होलाष्टक में क्या न करें?
शुभ कार्य वर्जित: शादी-विवाह, सगाई, नया व्यापार शुरू करना या वाहन खरीदना इन 8 दिनों में टाल देना चाहिए।
भवन निर्माण: भूमि पूजन या गृह प्रवेश जैसे निर्माण कार्य भी इस अवधि में वर्जित माने गए हैं।
वैज्ञानिक और ज्योतिषीय आधार
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, होलाष्टक में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र रूप में रहते हैं। यही कारण है कि इस दौरान मन विचलित रह सकता है, इसलिए भक्ति और शांति के उपाय फलदायी होते हैं।