Supreme Court : जब अचानक सायरन बजते ही थम गया न्याय का पहिया,महात्मा गांधी की याद में मौन हुए जज और वकील
News India Live, Digital Desk: देश की सबसे बड़ी अदालत, जहाँ हर पल दलीलों का शोर और न्याय की जिरह चलती है, आज सुबह अचानक एक गहरे सन्नाटे में डूब गई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि के अवसर पर, सुप्रीम कोर्ट के गलियारों और कोर्ट रूम में 'सायरन' की गूंज के साथ ही सब कुछ थम गया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) से लेकर वरिष्ठ वकील और कोर्ट स्टाफ तक, सभी ने 2 मिनट का मौन रखकर बापू के बलिदान को याद किया।
2 मिनट का वो 'अनुशासित सन्नाटा'
ठीक सुबह 11:00 बजे जैसे ही शहीदों की याद में सायरन बजा, सुप्रीम कोर्ट का दृश्य पूरी तरह बदल गया:
कोर्ट रूम की कार्यवाही रुकी: चल रही सुनवाई के बीच में ही जज अपनी सीटों पर खड़े हो गए और वकीलों ने अपनी फाइलें बंद कर दीं।
सन्नाटे की गूंज: वह परिसर जो आम तौर पर गहमागहमी से भरा रहता है, वहाँ केवल शांति का वास था। यह नजारा बापू के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के प्रति न्यायपालिका के सम्मान को दर्शा रहा था।
शहीद दिवस की गरिमा: सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ दिल्ली हाईकोर्ट और जिला अदालतों में भी इसी तरह श्रद्धांजलि दी गई।
बापू और न्यायपालिका: एक गहरा नाता
| पक्ष | विवरण |
|---|---|
| वकील के रूप में गांधी | महात्मा गांधी स्वयं एक कुशल वकील थे, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका और भारत में न्याय की लड़ाई लड़ी। |
| सत्य का मार्ग | सुप्रीम कोर्ट का ध्येय वाक्य 'यतो धर्मस्ततो जयः' (जहाँ धर्म है, वहाँ विजय है) बापू के सत्य के मार्ग से मेल खाता है। |
| न्याय में सादगी | सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में आज भी गांधीवादी दर्शन की झलक देखने को मिलती है। |
गांधी स्मृति और राजघाट पर भी श्रद्धांजलि
सुप्रीम कोर्ट के इस मौन के साथ ही, राजघाट पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने बापू की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। सेना के जवानों ने भी शस्त्र झुकाकर राष्ट्रपिता को सलामी दी।
'शहीद दिवस' का महत्व
30 जनवरी को हर साल भारत में 'शहीद दिवस' के रूप में मनाया जाता है। 1948 में इसी दिन नाथूराम गोडसे ने बिड़ला हाउस (अब गांधी स्मृति) में प्रार्थना सभा के दौरान बापू की हत्या कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट में हर साल इस दिन मौन रखने की परंपरा है, जो यह याद दिलाती है कि न्याय की बुनियाद हमेशा शांति और सत्य पर टिकी होनी चाहिए।