अमित शाह का राहुल गांधी पर वार ,असम के चाय बागान श्रमिकों के लिए यूरोपीय संघ से सीधे व्यापार का मेगा प्लान

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News India Live, Digital Desk: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम के डिब्रूगढ़ में 'विजय संकल्प' रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी को उनके विदेशी दौरों और बयानों पर जमकर घेरा। इसके साथ ही, शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी में असम की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले चाय उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने का विजन पेश किया।

राहुल गांधी पर तीखा हमला: "विदेशी धरती पर देश की बदनामी"

अमित शाह ने कहा कि जब भी देश में शांति और प्रगति होती है, राहुल गांधी विदेश जाकर भारत की छवि खराब करने की कोशिश करते हैं।

बयान: "राहुल बाबा, आप विदेश में जाकर अपने देश की बुराई करते हैं। याद रखिए, असम और देश की जनता यह सब देख रही है और समय आने पर करारा जवाब देगी।"

संसद और लोकतंत्र: शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद की कार्यवाही में बाधा डालता है और फिर लोकतंत्र के खतरे में होने का रोना रोता है।

असम टी (Assam Tea) के लिए 'यूरोपीय संघ' (EU) का दरवाजा

चाय बागान श्रमिकों को साधते हुए अमित शाह ने एक बड़ा आर्थिक वादा किया। उन्होंने कहा कि सरकार अब असम की चाय को बिचौलियों के बजाय सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की तैयारी में है।

योजना का नाममुख्य उद्देश्य
Direct EU Tradeअसम की चाय को सीधे यूरोपीय संघ (European Union) के बाजारों में बेचना।
श्रमिक कल्याणचाय बागान श्रमिकों की दिहाड़ी में वृद्धि और उनके बच्चों के लिए विशेष शिक्षा कोष।
जीआई टैगिंगअसम की चाय की वैश्विक ब्रांडिंग को और मजबूत करना।

हिमंत बिस्वा सरमा के काम की तारीफ

शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में असम से उग्रवाद का लगभग अंत हो चुका है और 'AFSPA' (अफस्पा) को अधिकांश क्षेत्रों से हटा लिया गया है।

शांति और विकास: "असम अब बम धमाकों का राज्य नहीं, बल्कि शांति और उद्योगों का राज्य बन चुका है।"

सेमीकंडक्टर प्लांट: टाटा ग्रुप द्वारा लगाए जा रहे सेमीकंडक्टर प्लांट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि असम अब 'हाई-टेक' हब बनेगा।

 क्यों अहम है डिब्रूगढ़?

डिब्रूगढ़ असम के 'अपर असम' (Upper Assam) क्षेत्र का केंद्र है और यहाँ चाय बागान श्रमिकों का वोट बैंक हार-जीत तय करता है। अमित शाह का यहाँ से सीधा यूरोपीय बाजार की बात करना, चीन की चाय से मिल रही चुनौती के बीच असम के चाय उत्पादकों को एक बड़ा सुरक्षा कवच देने का संकेत है।