Maharashtra Political : अजित पवार और शरद पवार की 14 गुप्त मुलाकातें, बीजेपी को थी हर पल की खबर

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News India Live, Digital Desk :  महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद अब उनकी राजनीतिक विरासत और एनसीपी के भविष्य को लेकर चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और पार्टी के करीबी सूत्रों के अनुसार, अजित पवार अपनी मौत से पहले एनसीपी के दोनों गुटों (अजित गुट और शरद पवार गुट) के विलय (Merger) के लिए जमीन तैयार कर चुके थे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 14 उच्च स्तरीय बैठकें हुईं, जिसकी जानकारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व को भी थी।

क्या था 'अजित दादा' का मेगा प्लान? (The Secret Roadmap)

अजित पवार के करीबी सहयोगी किरण गुजर और वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख के बयानों से जो जानकारी छनकर आई है, वह इस प्रकार है:

विलय की तारीख: दोनों गुटों के एकीकरण की आधिकारिक घोषणा 8 फरवरी 2026 को होनी तय थी।

अंतिम इच्छा: अजित पवार चाहते थे कि परिवार और पार्टी फिर से एक हो जाए। उन्होंने अपनी मृत्यु से महज 5 दिन पहले अपने करीबियों से कहा था कि "प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।"

बीजेपी को भरोसे में लेना: यह दावा किया जा रहा है कि अजित पवार ने अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं (जैसे देवेंद्र फडणवीस) को इन मुलाकातों और विलय की मंशा के बारे में सूचित कर रखा था।

कैसा होता 'एकजुट एनसीपी' का नया स्वरूप?

रिपोर्ट्स के अनुसार, विलय के बाद शक्ति संतुलन (Power Balancing) के लिए एक फॉर्मूला तय किया गया था:

पद/भूमिकाप्रस्तावित नेतृत्व
मार्गदर्शक (Patriarch)शरद पवार (पार्टी के शीर्ष चेहरा और संरक्षक के रूप में)।
राज्य की कमान (State)अजित पवार (महाराष्ट्र की कमान संभालते)।
राष्ट्रीय चेहरा (National)सुप्रिया सुले (दिल्ली में पार्टी का नेतृत्व और केंद्रीय राजनीति)।

निकाय चुनावों में 'पायलट प्रोजेक्ट'

विलय की सुगबुगाहट तब और तेज हुई थी जब हाल ही में हुए पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। हालांकि, परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन इसने कैडर को एक होने का स्पष्ट संदेश दे दिया था।

अब क्या होगा?

अजित पवार के निधन के बाद अब नेतृत्व का एक बड़ा 'वैक्यूम' (खालीपन) पैदा हो गया है।

सुनेत्रा पवार का नाम: चर्चा है कि अजित पवार की जगह उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है, ताकि 41 विधायकों का गुट बिखरे नहीं।

शरद पवार की भूमिका: अब पूरी गेंद शरद पवार के पाले में है। क्या वे अपने भतीजे की आखिरी इच्छा का सम्मान करते हुए पार्टी का पूर्ण विलय करेंगे या महायुति (Mahayuti) से गठबंधन तोड़कर फिर से विपक्षी गठबंधन (MVA) के साथ जाएंगे?