Supreme Court on Hate Speech : हेट स्पीच याचिका पर SC सख्त चयनात्मक होने पर याचिकाकर्ता को लगाई फटकार
News India Live, Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उस याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले 'अमर्यादित' भाषणों के खिलाफ दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल कुछ खास व्यक्तियों को निशाना बनाया है, जबकि दूसरों को छोड़ दिया है।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: 'चयनात्मक रवैया मंजूर नहीं'
सुनवाई के दौरान जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा, तो बेंच ने स्पष्ट किया कि कोर्ट इस तरह के "चयनात्मक" (Selective) रुख को स्वीकार नहीं करेगा। कोर्ट ने कहा:"आपने अपनी सुविधा के अनुसार कुछ व्यक्तियों को चुना है और दूसरों को अनदेखा कर दिया है। यह निष्पक्ष नहीं है। यदि आप दिशा-निर्देश चाहते हैं, तो याचिका को व्यापक और धर्मनिरपेक्ष (Religion-neutral) होना चाहिए।"
याचिका में संशोधन का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद, कपिल सिब्बल याचिका में संशोधन करने और एक नई याचिका दायर करने के लिए सहमत हो गए। कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह का समय दिया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले दिए गए भड़काऊ भाषणों पर भी लगाम लगाई जानी चाहिए, क्योंकि वे सोशल मीडिया के जरिए चुनाव के दौरान भी माहौल बिगाड़ते हैं।
हिमंता बिस्वा सरमा मामले में भी राहत नहीं
इसी दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ हेट स्पीच के आरोपों वाली एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को असम (गुवाहाटी) हाईकोर्ट जाने का निर्देश देते हुए कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आना उचित नहीं है और यह हाईकोर्ट की शक्तियों को कमतर आंकने जैसा है।
अब तक का न्यायिक रुख
स्वत: संज्ञान FIR: कोर्ट पहले ही सभी राज्यों को निर्देश दे चुका है कि हेट स्पीच के मामलों में बिना किसी शिकायत का इंतजार किए पुलिस को खुद (Suo Motu) एफआईआर दर्ज करनी चाहिए।
संवैधानिक नैतिकता: जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने टिप्पणी की कि राजनीतिक दलों को 'बंधुत्व' (Fraternity) को बढ़ावा देना चाहिए और चुनाव आपसी सम्मान के आधार पर लड़े जाने चाहिए।