MBBS की ऐसी सनक कि दांव पर लगा दी अपनी ही देह, जौनपुर के छात्र का यह कदम झकझोर कर रख देगा

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News India Live, Digital Desk: आज के दौर में हम अपने बच्चों के सिर पर करियर का ऐसा बोझ लाद देते हैं कि कभी-कभी वे हार को बर्दाश्त करने की ताकत खो बैठते हैं। उत्तर प्रदेश के जौनपुर से एक ऐसी खबर आई है, जिसे पढ़कर हर मां-बाप का दिल दहल जाएगा। नीट-यूजी (NEET UG) की परीक्षा में फेल होने के बाद एमबीबीएस की सीट न मिल पाने के तनाव में एक नौजवान छात्र ने वह किया, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।

अखबारों और खबरों में तो हम रोज पढ़ते हैं कि किसी ने हार मानकर गलत रास्ता चुन लिया, लेकिन इस छात्र ने जो किया, वह किसी भी पत्थर दिल इंसान को रुला दे।

क्या थी पूरी घटना?
जानकारी के अनुसार, जौनपुर का यह छात्र डॉक्टर बनने का सपना देख रहा था। कड़ी मेहनत के बावजूद जब परिणाम उसके पक्ष में नहीं आए और उसे लगा कि अब उसे मेडिकल की सीट नहीं मिलेगी, तो वह मानसिक रूप से बुरी तरह टूट गया। इस निराशा और हताशा में उसने अपना ही पैर काट लिया। आज वह अस्पताल के बिस्तर पर है, और यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि हम अपनी अगली पीढ़ी को क्या सिखा रहे हैं?

कम्पटीशन का बढ़ता बोझ और मासूम जान
आजकल डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना सिर्फ बच्चे का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का सम्मान बन गया है। नीट जैसे कड़े इम्तिहानों में हर साल लाखों बच्चे बैठते हैं, लेकिन सीटें सीमित हैं। ऐसे में जो बच्चे असफल रह जाते हैं, वे खुद को 'गुनहगार' मानने लगते हैं। जौनपुर की इस घटना ने साफ कर दिया है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा का दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर किस कदर हावी हो रहा है।

अभिभावकों के लिए एक संदेश
क्या सफेद कोट और आला (Stethoscope) हमारी जिंदगी से बढ़कर है? हमें बच्चों को यह सिखाने की सख्त जरूरत है कि 'परीक्षा में फेल होना, जिंदगी में फेल होना नहीं है'। एक दरवाजा बंद होने पर हजारों रास्ते खुलते हैं। बच्चों की काउंसलिंग करना और उनके मानसिक दबाव को समझना आज वक्त की सबसे बड़ी मांग है।

भगवान से दुआ है कि वह इस बच्चे को साहस दे और बाकी बच्चों के मन से 'फेल' होने के इस जानलेवा डर को निकालने की ताकत हमें दे।