श्रीशैलम मल्लिकार्जुन जहाँ माँ पार्वती और भोलेनाथ का है अनूठा साथ, जाने क्या है पौराणिक कहानी
News India Live, Digital Desk: हमारे देश में मंदिरों की कमी नहीं है। कहीं ज्योतिर्लिंग हैं तो कहीं माता के शक्तिपीठ। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या कोई ऐसी जगह है जहाँ ये दोनों महाशक्तियां एक साथ मौजूद हों? जी हाँ, एक ऐसी अद्भुत जगह है जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग गहराई से जानते हैं।
आज हम आपको ले चलते हैं दक्षिण भारत के एक ऐसे पवित्र धाम की यात्रा पर, जहाँ जाने मात्र से आपको शिव और शक्ति दोनों के दर्शन एक साथ हो जाते हैं। हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के 'श्रीशैलम' (Srisailam) की।
क्या खास है इस मंदिर में?
सबसे पहले तो यह जान लीजिये कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान शिव का 'ज्योतिर्लिंग' और माता सती का 'शक्तिपीठ' एक ही प्रांगण में है। आमतौर पर ये दोनों अलग-अलग जगहों पर होते हैं, लेकिन श्रीशैलम में इनका मिलन होता है। यहाँ भगवान शिव 'मल्लिकार्जुन' (Mallikarjuna Jyotirlinga) के रूप में और माता पार्वती 'भ्रमराम्बा देवी' (Bhramaramba Shaktipeeth) के रूप में विराजमान हैं। इसी वजह से इसे बहुत ही जाग्रत और पवित्र स्थल माना जाता है।
रंग बदलने वाला शिवलिंग?
इस मंदिर से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो आपको हैरान कर देंगी। यहाँ आने वाले भक्त और स्थानीय लोग बताते हैं कि यहाँ स्थापित शिवलिंग दिन के अलग-अलग समय में अपना रंग बदलता हुआ प्रतीत होता है। ऐसी मान्यता है कि सुबह, दोपहर और शाम के वक्त अगर आप शिवलिंग को ध्यान से देखें, तो उसकी आभा अलग-अलग नज़र आती है। यह मात्र सूर्य की किरणों का खेल है या प्रभु की लीला, यह तो श्रद्धा का विषय है, लेकिन इसे देखना अपने आप में एक अनोखा अनुभव होता है।
पहाड़ों के बीच बसा अलौकिक धाम
यह मंदिर नल्लमला की पहाड़ियों (Nallamala Hills) पर स्थित है और इसके पास से ही पवित्र कृष्णा नदी बहती है, जिसे यहाँ 'पाताल गंगा' कहा जाता है। पहाड़ी रास्ता और चारों तरफ हरियाली इस सफर को और भी रूहानी बना देती है।
पौराणिक कहानी क्या कहती है?
एक बहुत ही प्यारी कहानी इस जगह से जुड़ी है। कहते हैं कि भगवान शिव और पार्वती अपने बेटे कार्तिकेय को मनाने के लिए यहाँ आए थे। जब कार्तिकेय नाराज़ होकर यहाँ आ गए, तो माता-पिता का मोह उन्हें यहाँ खींच लाया। कहते हैं कि अमावस्या के दिन भगवान शिव यहाँ आते हैं और पूर्णिमा के दिन माता पार्वती।
यहाँ एक और ख़ास बात है—दक्षिण भारत के कई मंदिरों के विपरीत, यहाँ आम भक्तों को गर्भगृह में जाकर शिवलिंग को छूने और अभिषेक करने की अनुमति मिल जाती है (नियमों के अनुसार)।
क्यों जाना चाहिए यहाँ?
अगर आप जीवन की भागदौड़ से थक गए हैं और कुछ पल शांति और शक्ति के साथ बिताना चाहते हैं, तो श्रीशैलम आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए। यहाँ आकर ऐसा लगता है जैसे आप प्रकृति और ईश्वर दोनों की गोद में बैठ गए हों।
अगली बार जब भी कोई तीर्थ यात्रा प्लान करें, तो इस "शिव-शक्ति" के संगम को मत भूलियेगा!