हॉकी इंडिया ने ओडिशा हॉकी संघ को भेजा कारण बताओ नोटिस: स्थायी सदस्यता छीनने की चेतावनी, जानिए क्या है पूरा विवाद?
भारतीय हॉकी की नर्सरी और मुख्य प्रायोजक राज्य रहे ओडिशा के खेल प्रशासन में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय खेल महासंघ 'हॉकी इंडिया' (Hockey India) ने हॉकी एसोसिएशन ऑफ ओडिशा (HAO) को एक गंभीर कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) जारी किया है। इस नोटिस में राष्ट्रीय संस्था के उप-नियमों (बाय-लॉज) के घोर उल्लंघन, पारदर्शिता की कमी और राज्य के भीतर चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का हवाला देते हुए पूछा गया है कि क्यों न ओडिशा संघ की 'स्थायी सदस्यता' (Permanent Membership) छीनकर उसे केवल 'एसोसिएट सदस्य' (Associate Member) में बदल दिया जाए। यदि सदस्यता डिमोट होती है, तो ओडिशा संघ राष्ट्रीय महासंघ की मुख्य निर्णयों और मतदान प्रक्रिया में अपना स्थायी अधिकार खो सकता है।
3 अक्टूबर को होने वाले चुनाव रद्द होने के बाद शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद उस समय सार्वजनिक हुआ जब 3 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित हॉकी एसोसिएशन ऑफ ओडिशा के बहुप्रतीक्षित चुनाव निर्वाचन अधिकारी (Electoral Officer) की प्रतिकूल और असंतोषजनक रिपोर्ट के बाद अचानक रोक दिए गए। इसके तुरंत बाद हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति (Executive Committee) की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें चुनावी प्रक्रिया में नियमों की खुली अनदेखी को लेकर कड़ा ऐतराज जताया गया और औपचारिक कारण बताओ नोटिस भेजने का सर्वसम्मति से फैसला लिया गया।
नोटिस जारी करने के पीछे की 4 मुख्य वजहें
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30 जिला इकाइयों के गठन की वैधता पर सवाल: हॉकी इंडिया ने अपनी जांच में पाया कि ओडिशा के 30 जिलों में से किसी भी जिला इकाई ने अपने स्थानीय चुनावों का नोटिस, आधिकारिक बैठक की कार्यवाही (Proceedings) या नतीजों से जुड़े अनिवार्य दस्तावेज जमा नहीं कराए थे। ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि जिला स्तरीय समितियों का गठन वैध और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हुआ था या वे केवल कागजों पर बनाई गई थीं।
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अंतिम मतदाता सूची (Electoral Roll) तैयार न होना: जिला संघों के प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण राज्य चुनाव के लिए वैध वोटर्स की अंतिम मतदाता सूची तय समय सीमा तक तैयार ही नहीं हो सकी। बिना सत्यापित मतदाता सूची के चुनाव कराने की कोशिश को महासंघ ने नियमों का खुला उल्लंघन माना।
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हॉकी इंडिया के बाय-लॉज और खेल संहिता की अनदेखी: राष्ट्रीय महासंघ के संविधान और राष्ट्रीय खेल विकास संहिता (National Sports Development Code) के तहत राज्य संघों को अपने सभी स्तरों पर पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया और समय पर ऑडिटेड दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होता है, जिसमें ओडिशा संघ विफल साबित हुआ।
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कुल 8 प्रमुख बिंदुओं पर जवाब तलब: हॉकी इंडिया ने अपने विस्तृत नोटिस में ओडिशा संघ की कार्यप्रणाली को लेकर कुल 8 मुख्य बिंदुओं पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं और विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
दो हफ्तों का अल्टीमेटम, आगे क्या हो सकती है कार्रवाई?
हॉकी इंडिया ने हॉकी एसोसिएशन ऑफ ओडिशा को इन सभी आपत्तियों का तथ्यात्मक जवाब देने और जरूरी वैधानिक मंजूरियों व जिला इकाइयों के चुनाव प्रमाण पेश करने के लिए दो सप्ताह (14 दिन) का समय दिया है। यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक दस्तावेज पेश नहीं किए जाते हैं, तो यह मामला हॉकी इंडिया की 'संबद्धता समिति' (Affiliation Committee) को भेजा जाएगा। इसके बाद महासंघ की आम सभा (General Body) में औपचारिक प्रस्ताव लाकर ओडिशा को स्थायी सदस्यता से हटाकर एसोसिएट मेंबर बना दिया जाएगा।
इस बीच, हॉकी ओडिशा के महासचिव प्रताप सत्पथी ने हॉकी इंडिया के इस सख्त कदम का स्वागत किया है और राज्य में हॉकी के पारदर्शी व निष्पक्ष प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार से भी इसमें हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।