Sperm Count & Fertility 2026: पिता बनने में आ रही है रुकावट? जानें कितना होना चाहिए स्पर्म काउंट और कैसे बढ़ाएं शुक्राणुओं की संख्या

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लखनऊ/नई दिल्ली। आज के दौर में बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण और मानसिक तनाव पुरुषों की प्रजनन क्षमता (Male Fertility) पर गहरा असर डाल रहे हैं। साल 2026 के चिकित्सा आंकड़े बताते हैं कि बांझपन की समस्या अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग 40-50% मामलों में पुरुष इसके जिम्मेदार पाए जा रहे हैं। पुरुष की प्रजनन क्षमता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना 'स्पर्म काउंट' (Sperm Count) होता है। यदि आप भी परिवार बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि शुक्राणुओं की सही संख्या, गुणवत्ता और गतिशीलता क्या होनी चाहिए।

क्या होता है नॉर्मल स्पर्म काउंट?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ताजा मानकों के अनुसार, एक स्वस्थ पुरुष के वीर्य (Semen) में प्रति मिलीलीटर कम से कम 15 मिलियन से 200 मिलियन शुक्राणु होने चाहिए।

ओलिगोस्पर्मिया: यदि यह संख्या 15 मिलियन से कम है, तो इसे 'ओलिगोस्पर्मिया' कहा जाता है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण (Natural Conception) में कठिनाई आ सकती है।

एस्थेनोज़ोस्पर्मिया: जब शुक्राणुओं की संख्या तो ठीक हो, लेकिन उनकी गतिशीलता (Motility) 40% से कम हो, तो इसे यह नाम दिया जाता है।

शुक्राणुओं की कमी के पीछे मुख्य कारण

शुक्रानुओं की संख्या कम होने के पीछे कई शारीरिक और जीवनशैली से जुड़े कारण हो सकते हैं:

शारीरिक कारण: अंडकोष की नसों में सूजन (Varicocele), हार्मोनल असंतुलन, संक्रमण या कोई पुरानी सर्जरी।

जीवनशैली: धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, मोटापा और अनियमित नींद।

तनाव: अत्यधिक मानसिक तनाव शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर देता है।

पर्यावरण: अधिक गर्मी में काम करना (जैसे लैपटॉप को जांघों पर रखना) या रसायनों के संपर्क में रहना।

स्पर्म काउंट और क्वालिटी सुधारने के 5 अचूक उपाय

2026 की आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के संगम से कुछ प्रभावी उपाय सामने आए हैं:

1. पोषक तत्वों से भरपूर आहार:

अपने भोजन में जिंक (Zinc), विटामिन C, विटामिन E और फोलिक एसिड को शामिल करें। कद्दू के बीज, अखरोट, हरी सब्जियां और खट्टे फल स्पर्म की गुणवत्ता के लिए रामबाण हैं।

2. आयुर्वेदिक औषधियां:

आयुर्वेद में अश्वगंधा और शतावरी को 'प्रजनन शक्ति वर्धक' माना गया है। अश्वगंधा न केवल तनाव कम करता है, बल्कि शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में 150% तक सुधार कर सकता है।

3. व्यायाम और पर्याप्त नींद:

रोजाना 30-45 मिनट का हल्का व्यायाम और कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद हार्मोनल संतुलन को बनाए रखती है।

4. बुरी आदतों को कहें अलविदा:

धूम्रपान और नशीले पदार्थों का सेवन सीधे तौर पर स्पर्म के डीएनए (DNA) को नुकसान पहुंचाता है। इसे छोड़ने के 3 महीने के भीतर शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार दिखने लगता है।

5. ठंडा वातावरण:

अंडकोष को अधिक गर्मी से बचाएं। ढीले सूती अंत:वस्त्र (Underwear) पहनें और लंबे समय तक गर्म पानी से नहाने से बचें।

सीमन एनालिसिस (Semen Analysis): कब कराएं जांच?

यदि एक साल तक असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पा रहा है, तो पुरुष को सीमन एनालिसिस टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इस टेस्ट में निम्न बिंदुओं की जांच होती है:

कुल संख्या: शुक्राणुओं की मात्रा।

गतिशीलता (Motility): शुक्राणु कितनी तेजी से अंडाणु की ओर बढ़ रहे हैं।

आकार (Morphology): शुक्राणुओं की बनावट कैसी है।

[Image showing Semen Analysis test report parameters]

चिकित्सा विज्ञान का सहारा: IVF और ICSI

यदि प्राकृतिक रूप से सुधार नहीं हो पा रहा है, तो आधुनिक तकनीकें जैसे IVF (In-Vitro Fertilization) और ICSI (Intracytoplasmic Sperm Injection) वरदान साबित हो रही हैं। ICSI तकनीक में एक अकेले स्वस्थ शुक्राणु को सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।

सलाह: किसी भी सप्लीमेंट या आयुर्वेदिक औषधि को शुरू करने से पहले एक अच्छे 'एंड्रोलॉजिस्ट' या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।