Google की लाखों की नौकरी और कैलिफोर्निया का ऐश-ओ-आराम छोड़ा, लखनऊ के बेटे ने UPSC में गाड़े सफलता के झंडे
News India Live, Digital Desk : सफलता की कहानियाँ तो बहुत होती हैं, लेकिन पीयूष कपूर की कहानी कुछ अलग है। क्या कोई सोच सकता है कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी Google में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की शानदार नौकरी और अमेरिका के कैलिफोर्निया की लग्जरी लाइफस्टाइल को कोई महज एक सपने के लिए छोड़ सकता है? लखनऊ के रहने वाले पीयूष ने न सिर्फ यह जोखिम उठाया, बल्कि अपने पहले ही गंभीर प्रयास में देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC को क्रैक कर दिखाया।
कैलिफोर्निया से लखनऊ तक का सफर
पीयूष कपूर का करियर ग्राफ किसी भी युवा के लिए एक 'ड्रीम लाइफ' जैसा था। शानदार सैलरी, गूगल जैसे ब्रांड का नाम और विदेश में बसने का मौका। लेकिन पीयूष के मन में कुछ और ही चल रहा था। उन्हें लगा कि कोडिंग और एल्गोरिदम के बीच वे समाज के लिए वो बदलाव नहीं ला पा रहे हैं, जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। इसी कसक ने उन्हें कैलिफोर्निया से वापस लखनऊ की गलियों में खींच लाया।
यूपीएससी की तैयारी: बिना किसी शोर-शराबे के मेहनत
गूगल छोड़ने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन पीयूष के इरादे फौलादी थे। उन्होंने अपनी तैयारी को बहुत ही व्यवस्थित रखा।
इंजीनियरिंग बैकग्राउंड का फायदा: पीयूष ने अपनी तार्किक क्षमता और डेटा एनालिसिस की स्किल्स को पढ़ाई में इस्तेमाल किया।
सेल्फ स्टडी पर जोर: उन्होंने कोचिंग के बजाय सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन रिसोर्सेज पर ज्यादा भरोसा किया।
दृढ़ संकल्प: अमेरिका की चकाचौंध से दूर, लखनऊ के एक कमरे में बंद होकर उन्होंने घंटों पढ़ाई की और करंट अफेयर्स से लेकर इतिहास-भूगोल तक हर विषय पर पकड़ बनाई।
जब नाम आया 'मेरिट लिस्ट' में
जब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नतीजे आए, तो पीयूष का नाम सफलता की लिस्ट में चमक रहा था। उनकी इस कामयाबी ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे पाने की तड़प सच्ची हो, तो दुनिया की कोई भी सुख-सुविधा आपके जुनून से बड़ी नहीं हो सकती। आज पीयूष न केवल लखनऊ बल्कि पूरे देश के उन प्रोफेशनल्स के लिए मिसाल बन गए हैं, जो अपनी जड़ों की ओर लौटकर देश की सेवा करना चाहते हैं।
युवाओं के लिए पीयूष का मूलमंत्र
पीयूष का मानना है कि असफलता से डरने के बजाय अपने कंफर्ट जोन (Comfort Zone) से बाहर निकलना जरूरी है। वे कहते हैं कि यूपीएससी केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व और धैर्य की परीक्षा है। अगर आप 'क्यों' (Why) क्लियर हैं, तो 'कैसे' (How) का रास्ता खुद-ब-खुद मिल जाता है।