जर्मनी से आया खास मेहमान ,जानिए फ्रेडरिक मर्ज़ का यह पहला भारत दौरा क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

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News India Live, Digital Desk : सोमवार का दिन भारत और जर्मनी के कूटनीतिक रिश्तों के लिए एक बड़ी हलचल लेकर आया। जर्मनी के कद्दावर नेता और भविष्य के संभावित चांसलर माने जा रहे फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। अक्सर लोग विदेशी दौरों को सिर्फ प्रोटोकॉल मानते हैं, लेकिन मर्ज़ की यह यात्रा कई मायनों में सामान्य से हटकर है।

कौन हैं फ्रेडरिक मर्ज़ और ये दौरा क्यों खास है?
मर्ज़ जर्मनी की प्रमुख राजनीतिक पार्टी CDU के नेता हैं और वहां की राजनीति में उनकी बात का बहुत वजन है। वे एक ऐसे समय में भारत आए हैं जब पूरी दुनिया अपनी अर्थव्यवस्था के लिए किसी एक देश (खासकर चीन) पर निर्भरता कम करना चाहती है। जर्मनी जैसे विकसित देश के लिए भारत एक ऐसा साथी बनकर उभरा है, जिसे अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

इस दौरे के बड़े एजेंडे क्या हैं?
मर्ज़ की इस यात्रा में तीन-चार मुख्य बातें सबसे ऊपर रहने वाली हैं:

  1. व्यापार और निवेश: जर्मनी चाहता है कि उसकी कंपनियां चीन से बाहर निकलकर भारत में अपना आधार मजबूत करें। यहाँ का बड़ा बाज़ार और सस्ता लेबर उन्हें लुभा रहा है।
  2. रक्षा सौदे (Defense Relations): भारत और जर्मनी अब रक्षा क्षेत्र में भी करीब आ रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि सबमरीन और अन्य उन्नत तकनीकों पर भी कोई बड़ा समझौता या बातचीत हो सकती है।
  3. टैलेंट की ज़रूरत: जर्मनी को काम करने वाले हाथों की यानी स्किल्ड युवाओं की कमी महसूस हो रही है। उन्हें पता है कि भारत के इंजीनियर और टेक प्रोफेशनल्स दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं।

भारत को क्या फायदा होगा?
एक आम हिंदुस्तानी के लिए यह सिर्फ दो नेताओं की मुलाकात नहीं है। जब जर्मनी जैसी इकोनॉमी के दिग्गज नेता भारत आते हैं, तो वह अपने साथ निवेश की संभावनाएं लाते हैं। इससे नई फैक्ट्रियां खुलती हैं, नौकरियां पैदा होती हैं और हमें उच्च स्तरीय 'जर्मन इंजीनियरिंग' की तकनीक सीखने का मौका मिलता है।

एक बदला हुआ नज़रिया
मर्ज़ की यह यात्रा इस बात का भी सबूत है कि भारत अब दुनिया की मेज़ पर 'शर्तो' के साथ बैठता है। चाहे वो रूस-यूक्रेन संकट हो या ग्लोबल सप्लाई चेन की बात, दुनिया मान रही है कि बिना भारत के किसी भी बड़ी समस्या का हल नहीं निकल सकता।

चलते-चलते
आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि आने वाले दशक में जर्मनी और भारत की दोस्ती कितनी गहराई तक जाएगी। फ्रेडरिक मर्ज़ का भारत की सरज़मीं पर उतरना सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भविष्य के मजबूत रिश्तों की एक बुनियाद है।