स्मार्टफोन बना बच्चों का दुश्मन ब्रिटेन में सोशल मीडिया बैन की चर्चा, क्या अब भारत में भी ऐसा होना चाहिए?
News India Live, Digital Desk : आजकल हम किसी भी पार्क में चले जाएं या घर में हों, एक नज़ारा हर जगह आम है नन्हें-नन्हें बच्चे फुटबॉल या गुड़ियों से खेलने के बजाय फोन की स्क्रीन पर उंगलियां चलाते हुए मिल जाएंगे। शुरुआत तो मज़े-मज़े में होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत एक लत में बदल जाती है। इसी बढ़ती हुई चिंता को देखते हुए अब ब्रिटेन (UK) सरकार ने एक बहुत ही बड़ा और कड़ा कदम उठाने का मन बनाया है।
मामला क्या है? सीधे शब्दों में समझिए
ब्रिटेन सरकार इस समय एक ऐसी योजना पर विचार कर रही है, जिसमें बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध (Ban) लगाया जा सकता है। असल में, इसकी शुरुआत 'ऑस्ट्रेलिया' से हुई थी, जहाँ 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करना कानूनी रूप से मना करने की तैयारी हो गई है। अब ब्रिटेन भी उसी रास्ते पर चलने की सोच रहा है।
आखिर सरकारें इतनी सख्त क्यों हो रही हैं?
यूं ही कोई सरकार बच्चों के 'मनोरंजन' पर पाबंदी नहीं लगाना चाहती। इसके पीछे की हकीकत थोड़ी डरावनी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंस्टाग्राम, टिक-टॉक और स्नैपचैट जैसे ऐप्स पर बच्चे घंटों बिताना शुरू कर देते हैं, जिससे उनके मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ रहा है।
सिर्फ़ इतना ही नहीं, 'साइबर बुलिंग' (इंटरनेट पर मानसिक रूप से परेशान करना) और छोटी उम्र में ही दुनिया की बुरी बातों से आमना-सामना होने की वजह से कई बच्चों में तनाव और डिप्रेशन बढ़ रहा है। ब्रिटेन की सरकार का मानना है कि अब वह समय आ गया है जब बच्चों को इस डिजिटल भूलभुलैया से बाहर निकाला जाए।
पढ़ाई पर भी पड़ रहा है गहरा असर
हम सब जानते हैं कि जब हाथ में फोन हो, तो होमवर्क और खेल-कूद सब पीछे छूट जाता है। सरकारों की चिंता यह भी है कि बच्चों की एकाग्रता (Focus) खत्म हो रही है। सोशल मीडिया के 'शॉर्ट्स' और 'रील्स' के दौर में अब किसी के पास लंबी किताब पढ़ने का धैर्य नहीं बचा है।
क्या ये नियम वाकई काम करेगा?
एक सवाल जो सबके मन में उठता है—क्या बच्चे फर्जी डेट ऑफ़ बर्थ (DOB) डालकर फिर से अकाउंट नहीं बना लेंगे? इसी का जवाब ढूंढने के लिए ब्रिटेन सरकार ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम करने की सोच रही है, जिससे 'उम्र की पहचान' पुख्ता की जा सके। यह उन कंपनियों की जिम्मेदारी होगी कि वे छोटे बच्चों को अपने प्लेटफार्म पर न आने दें।