Sleep & Unani Medicine: नींद केवल आराम नहीं, इलाज भी है जानें यूनानी चिकित्सा के अनुसार सोने का सही तरीका

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News India Live, Digital Desk: यूनानी चिकित्सा पद्धति के महान विद्वानों (जैसे इब्न सिना या एविसेना) का मानना था कि नींद और जागना (Naum-o-Yaqzah) शरीर के मिजाज (Temperament) को संतुलित रखने के लिए बहुत जरूरी हैं। यदि आपकी नींद खराब है, तो दुनिया की कोई भी दवा आपको पूरी तरह स्वस्थ नहीं कर सकती।

यूनानी चिकित्सा के अनुसार नींद क्यों है जरूरी?

रूह और कुव्वत की बहाली: यूनानी सिद्धांतों के अनुसार, नींद के दौरान शरीर की 'कुव्वत-ए-मुदब्बिरा-ए-बदन' (शरीर की प्राकृतिक उपचार शक्ति) सबसे अधिक सक्रिय होती है। यह शरीर की मरम्मत करती है और आंतरिक अंगों को ऊर्जा प्रदान करती है।

पाचन में सहायक (Hazm): नींद के दौरान शरीर की गर्मी (Hararat-e-Ghariziyah) अंदरूनी अंगों की ओर मुड़ जाती है, जिससे पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है। यही कारण है कि अच्छी नींद के बाद सुबह पेट खुलकर साफ होता है।

मिजाज का संतुलन: गहरी नींद शरीर को ठंडक और नमी (Moisture) प्रदान करती है, जो दिनभर की भागदौड़ से पैदा हुई खुश्की और गर्मी को शांत करती है।

नींद की कमी (Insomnia) के नुकसान

यूनानी पद्धति के अनुसार, पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में 'खुश्की' (Dryness) बढ़ जाती है, जिससे ये समस्याएं हो सकती हैं:

याददाश्त कमजोर होना और मानसिक भ्रम।

समय से पहले बुढ़ापा और त्वचा की चमक खोना।

चिड़चिड़ापन और पाचन तंत्र का बिगड़ना।

बेहतर नींद के लिए यूनानी टिप्स (Sleep Hygiene)

समय का पालन: रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना प्राकृतिक मिजाज के अनुकूल है।

खाली पेट न सोएं: बहुत अधिक पेट भरकर या बिल्कुल भूखे पेट सोना, दोनों ही नींद में खलल डालते हैं।

मालिश (Dalk): यदि नींद न आने की समस्या हो, तो सिर और तलवों पर रोगन-ए-कद्दू (कद्दू का तेल) या बादाम तेल की मालिश करना बहुत असरदार होता है।

वातावरण: सोने का कमरा शांत, अंधेरा और हल्का ठंडा होना चाहिए ताकि रूह को सुकून मिले।