झारखंड में नाबालिग से दरिंदगी और हत्या का आरोपी गिरफ्तार, SIT को मिली बड़ी कामयाबी
News India Live, Digital Desk: झारखंड के गढ़वा जिले में पिछले एक महीने से पुलिस के लिए सिरदर्द बनी नाबालिग लड़की की रेप और हत्या की गुत्थी आखिरकार सुलझ गई है। पुलिस ने 27 साल के एक युवक को इस जघन्य अपराध के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस अंधे कत्ल (Blind Murder) को सुलझाने के लिए पुलिस ने 600 से अधिक लोगों से पूछताछ की और 200 मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाली। लेकिन अंत में, घटनास्थल पर छूटी एक जोड़ी 'चप्पल' कातिल तक पहुँचने का सबसे बड़ा जरिया बनी।
1. शादी समारोह और वो काली रात (21 फरवरी)
यह दर्दनाक घटना 21 फरवरी 2026 को रामकंडा थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी।
वारदात: 17 साल की पीड़िता अपनी मां और बहन के साथ एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने आई थी। देर रात वह शौच के लिए घर से बाहर निकली, जहाँ आरोपी पहले से घात लगाकर उसका पीछा कर रहा था।
बर्बरता: आरोपी ने भागती हुई लड़की को पकड़ लिया और उसका मुंह दबाने के लिए उसी के कपड़े ठूंस दिए। खेत में ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की गई और पहचान उजागर होने के डर से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई।
2. SIT का गठन और महा-मंथन
23 फरवरी को शव मिलने के बाद इलाके में भारी तनाव व्याप्त हो गया था। गढ़वा एसपी अमन कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया।
बड़ी मशक्कत: चूँकि घटना शादी वाले घर के पास हुई थी, इसलिए पुलिस ने वहां आए हर मेहमान और संदिग्ध ग्रामीण (कुल 600 लोग) से लंबी पूछताछ की।
ब्रेकथ्रू: अपराध स्थल के पास से पुलिस को एक जोड़ी चप्पल मिली थी। जांच दल ने गांव के हर संदिग्ध व्यक्ति के पैर के नाप और उनकी चप्पलों के मिलान के जरिए घेराबंदी शुरू की, जिससे आरोपी पुलिस के रडार पर आ गया।
3. "चप्पल मेरी ही है": आरोपी का कबूलनामा
पुलिस हिरासत में लेने के बाद जब आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की गई और वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence) सामने रखे गए, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह शादी समारोह में ही शामिल होने आया था और लड़की को अकेला देख उसकी नीयत बिगड़ गई थी। चप्पलें संघर्ष के दौरान वहीं छूट गई थीं, जिसे वह हड़बड़ाहट में उठाना भूल गया।
4. पुलिस की सतर्कता और वैज्ञानिक जांच
गढ़वा पुलिस की इस कार्रवाई की चारों ओर सराहना हो रही है। एसपी अमन कुमार ने बताया कि यह एक चुनौतीपूर्ण मामला था क्योंकि कोई प्रत्यक्षदर्शी (Eyewitness) नहीं था।
तकनीकी मदद: कॉल रिकॉर्ड्स और चप्पल के फॉरेंसिक मिलान ने केस को कोर्ट में मजबूत बनाने के लिए पुख्ता आधार प्रदान किया है।
कार्रवाई: आरोपी को जेल भेज दिया गया है और पुलिस अब 'फास्ट ट्रैक कोर्ट' (Fast Track Court) के जरिए उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की तैयारी कर रही है।