Shankaracharya vs Yogi : हमने शंकराचार्य होने का प्रमाण दिया, योगी भी हिंदू होने का सबूत दें,अविमुक्तेश्वरानंद के तीखे प्रहार
News India Live, Digital Desk: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच जुबानी जंग अब एक नए और बेहद आक्रामक मोड़ पर पहुँच गई है। हाल ही में शंकराचार्य की नियुक्ति और उनकी प्रामाणिकता को लेकर उठे सवालों के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीधे मुख्यमंत्री पर हमला बोला है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि मुख्यमंत्री उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगते हैं, तो उन्हें भी अपने 'हिंदू' होने का प्रमाण सार्वजनिक करना चाहिए, अन्यथा वे चुप रहें।
विवाद की जड़: क्यों भड़के शंकराचार्य?
दरअसल, पिछले कुछ समय से शंकराचार्य की पदवी और उनके द्वारा उठाए गए धार्मिक मुद्दों (जैसे केदारनाथ से सोना चोरी या राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा की विधि) को लेकर सत्ता पक्ष और उनके बीच ठनी हुई है।
प्रामाणिकता पर सवाल: जब मुख्यमंत्री कार्यालय या उनके समर्थकों की ओर से शंकराचार्य की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए, तो अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे 'सनातन धर्म के सर्वोच्च पद का अपमान' बताया।
अविमुक्तेश्वरानंद का तर्क: उन्होंने कहा, "हमारा अभिषेक विधि-विधान और शास्त्रों के अनुसार हुआ है, जिसके हमारे पास पर्याप्त प्रमाण हैं। जो लोग सत्ता के मद में चूर होकर संतों से सबूत मांग रहे हैं, वे खुद बताएं कि हिंदू धर्म के प्रति उनकी निष्ठा और कर्म क्या हैं।"
शंकराचार्य के 3 सबसे तीखे प्रहार
हिंदू होने का प्रमाण: "अगर पद की गरिमा के लिए प्रमाण चाहिए, तो मुख्यमंत्री जी बताएं कि वे किस आधार पर खुद को हिंदू रक्षक कहते हैं? क्या सिर्फ गेरुआ वस्त्र पहन लेने से कोई हिंदू धर्म का ठेकेदार बन जाता है?"
शास्त्रों की अनदेखी: "सत्ता में बैठे लोग शास्त्रों की मर्यादा को नहीं मानते। वे संतों को अपने अधीन करना चाहते हैं, जो कभी नहीं होगा।"
भय की राजनीति: शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि जो भी उनके (सरकार के) सुर में सुर नहीं मिलाता, उसकी साख पर सवाल उठाए जाने लगते हैं।
सनातन धर्म में शंकराचार्य का स्थान (Hierarchy)
शंकराचार्य ने याद दिलाया कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों का महत्व किसी भी राजनीतिक पद से ऊपर है।
| पीठ | स्थान | दिशा |
|---|---|---|
| ज्योतिष पीठ | बद्रीनाथ (उत्तराखंड) | उत्तर |
| गोवर्धन पीठ | पुरी (ओडिशा) | पूर्व |
| शारदा पीठ | द्वारका (गुजरात) | पश्चिम |
| श्रृंगेरी पीठ | चिकमगलूर (कर्नाटक) | दक्षिण |
अमर उजाला विशेष: क्या होगा इस विवाद का असर?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल धार्मिक नहीं रह गया है। उत्तर प्रदेश में संतों के दो धड़े बनते दिख रहे हैं एक जो योगी सरकार के साथ है और दूसरा जो अविमुक्तेश्वरानंद के नेतृत्व में सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहा है। आने वाले समय में यह विवाद कुंभ मेले (2025-26) और अन्य धार्मिक आयोजनों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
बीजेपी और सरकार का रुख
फिलहाल भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस सीधे हमले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया पर योगी समर्थकों और संतों के बीच बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे 'विपक्ष प्रायोजित' बयान बता रहे हैं, तो कुछ इसे 'धर्म की स्वतंत्रता' की लड़ाई।