Shab-e-Barat 2026 : इबादत और मगफिरत की मुकद्दस रात, जानें आपके शहर में कब होगा चांद का दीदार और क्या है इफ्तार का समय

Post

News India Live, Digital Desk: दुनिया भर के साथ भारत में भी 'शब-ए-बारात' (Shab-e-Barat) की मुकद्दस रात पूरी अकीदत के साथ मनाई जा रही है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, शाबान महीने की 15वीं तारीख को मनाई जाने वाली यह रात इबादत, माफी और रूहानी सुकून के लिए जानी जाती है। इस रात को 'मगफिरत की रात' (Night of Forgiveness) भी कहा जाता है, जहाँ बंदे अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और आने वाले साल की बेहतरी के लिए दुआ करते हैं।

शब-ए-बारात 2026 की सही तारीख: कब है इबादत की रात?

भारत में शब-ए-बारात का आगाज 3 फरवरी 2026, मंगलवार की शाम (मगरिब की नमाज के बाद) से हो चुका है। यह इबादत की रात 4 फरवरी 2026 की सुबह (फज्र) तक जारी रहेगी। इसके अगले दिन यानी 4 फरवरी 2026, बुधवार को शब-ए-बारात का विशेष 'नफिल' रोजा रखा जाएगा।

शहरवार चंद्रोदय और सूर्यास्त का समय (3-4 फरवरी 2026)

इबादत और रोजे के लिए सटीक समय का होना बेहद जरूरी है। भारत के प्रमुख शहरों में आज का समय कुछ इस प्रकार है:

शहरसूर्यास्त (Sunset)चांद निकलने का समय
नई दिल्ली/नोएडा06:11 PM07:38 PM - 07:45 PM
लखनऊ/कानपुर06:09 PM07:42 PM - 07:50 PM
मुंबई/पुणे06:28 PM07:55 PM - 08:05 PM
पटना/वाराणसी05:55 PM07:35 PM - 07:45 PM
जयपुर/उदयपुर06:14 PM07:45 PM - 07:53 PM
हैदराबाद/बेंगलुरु06:18 PM07:50 PM - 08:00 PM

शब-ए-बारात का धार्मिक महत्व और रिवाज

इस्लाम में इस रात को बेहद फजीलत वाली रात माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

तौबा की रात: इस रात अल्लाह अपने बंदों के लिए रहमत के दरवाजे खोल देता है और सच्चे दिल से मांगी गई तौबा को कबूल करता है।

तक़दीर का फैसला: माना जाता है कि इसी रात आने वाले एक साल के लिए लोगों की जिंदगी, मौत और रिस्क (रोजी-रोटी) का फैसला होता है।

कब्रिस्तान की जियारत: इस मौके पर लोग कब्रिस्तान जाकर अपने बुजुर्गों और मरहूमों (दुनिया से रुखसत हो चुके लोगों) की कब्र पर फातिहा पढ़ते हैं और उनके लिए मगफिरत की दुआ करते हैं।

रोजा, सहरी और इफ्तार की गाइडलाइंस

जो लोग 4 फरवरी को रोजा रख रहे हैं, उनके लिए समय का पालन अनिवार्य है:

सहरी का समय: 4 फरवरी की सुबह लगभग 05:20 AM से पहले (अपने शहर के अनुसार सही समय देखें)।

इफ्तार का समय: 4 फरवरी की शाम लगभग 06:12 PM के बाद।

नियत: "मैं अल्लाह की रजा के लिए शब-ए-बारात का नफिल रोजा रखने की नियत करता/करती हूँ।"

हलवा और चिरागां की परंपरा

भारत और दक्षिण एशियाई देशों में इस रात घरों में हलवा बनाने और चिरागां (रोशनी) करने की भी पुरानी परंपरा है। लोग एक-दूसरे के घर जाकर दुआओं में शामिल होते हैं और गरीबों में खैरात (दान) बांटते हैं।