तेजस्वी के अकेलेपन पर वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने खोल दिया बड़ा सियासी राज़

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News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति का सबसे ताज़ा वाकया चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, राजद के युवा नेता तेजस्वी यादव जब पटना एयरपोर्ट पर लैंड हुए, तो वहाँ वह जोश और भीड़ नज़र नहीं आई जो आमतौर पर उनकी मौजूदगी में दिखती है। और सबसे चौंकाने वाली बात जो पार्टी के दिग्गज नेता शिवानंद तिवारी ने गौर की, वो ये कि स्वागत के लिए पार्टी का एक भी विधायक (MLA) वहाँ मौजूद नहीं था।

शक्ति प्रदर्शन की जगह क्यों दिखा सन्नाटा?
शिवानंद तिवारी, जो अक्सर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने साफ़ तौर पर यह सवाल उठाया है कि आखिर पार्टी का कोई नेता या विधायक तेजस्वी को रिसीव करने क्यों नहीं पहुँचा। बिहार जैसे राज्य में, जहाँ एयरपोर्ट की तस्वीरें भी 'शक्ति प्रदर्शन' का हिस्सा होती हैं, वहाँ तेजस्वी का अकेले दिखना कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है।

शिवानंद तिवारी का इशारा किस तरफ है?
देखा जाए तो शिवानंद तिवारी का यह बयान सिर्फ एक सामान्य टिप्पणी नहीं है। इसके पीछे कई मायने छिपे हो सकते हैं:

  1. तालमेल की कमी: क्या पार्टी के भीतर विधायकों और आलाकमान के बीच कम्युनिकेशंस यानी बातचीत का कोई गैप आ गया है?
  2. नई रणनीति: क्या राजद अब उस पुराने 'शक्ति प्रदर्शन' वाली शैली को बदलकर काम पर ज़्यादा ज़ोर देने की कोशिश कर रही है?
  3. नेताओं की बेरुखी: या फिर क्या पर्दे के पीछे कुछ ऐसी बातें चल रही हैं जिन्हें दबाने की कोशिश हो रही है?

सोशल मीडिया और विपक्ष का नज़रिया
विपक्ष को तो बैठे-बिठाए एक मुद्दा मिल गया है। लोग अब यह चर्चा करने लगे हैं कि क्या अब राजद के भीतर ही लोग अपनी राह अलग देख रहे हैं? हालाँकि, तेजस्वी यादव के समर्थकों का तर्क हो सकता है कि उन्होंने सादगी से आने का फैसला किया होगा या प्रोटोकॉल का पालन किया होगा, लेकिन शिवानंद तिवारी का इस पर सवाल उठाना मामला को गंभीर बना देता है।

अंदरुनी राजनीति में मची हलचल
किसी भी पार्टी के लिए उसका युवा नेतृत्व रीढ़ की हड्डी की तरह होता है। शिवानंद तिवारी ने दबी जुबान में कहीं न कहीं उस संगठन की मजबूती पर सवाल किया है जो अपने ही नेता के आने पर ढुलमुल नज़र आ रहा था। आने वाले चुनाव और गठबंधन की उठापटक के बीच, तेजस्वी यादव के लिए अपनी पकड़ फिर से मज़बूत करना ज़रूरी होगा ताकि जनता और उनके अपने नेताओं में विश्वास बना रहे।

अभी तक राजद की ओर से इस पर कोई बड़ी आधिकारिक सफ़ाई नहीं आई है, लेकिन पटना की गलियों में अब इसी बात पर बहस गर्म है कि"क्या राजद के भीतर हवा बदल रही है?"