बांग्लादेश-अमेरिका के बीच होने वाली है सीक्रेट ट्रेड डील? भारत पर क्या होगा असर और 2026 चुनाव से क्या है कनेक्शन?

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News India Live, Digital Desk: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। चर्चा है कि बांग्लादेश और अमेरिका एक 'सीक्रेट ट्रेड डील' (गुप्त व्यापारिक समझौते) की ओर बढ़ रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश 2026 के आम चुनावों की ओर बढ़ रहा है और देश के भीतर राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है। इस संभावित डील ने न केवल आर्थिक गलियारों में, बल्कि भारत जैसे पड़ोसी देशों के कूटनीतिक हलकों में भी सरगर्मी बढ़ा दी है।

2026 चुनाव और अमेरिका का 'सॉफ्ट पावर' दांव

जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और अमेरिका के बीच यह बातचीत चुनाव से पहले देश की चरमराती अर्थव्यवस्था को सहारा देने की एक कोशिश हो सकती है। अमेरिका, जो बांग्लादेशी गारमेंट सेक्टर का सबसे बड़ा खरीदार है, टैरिफ (Tariff) और व्यापारिक रियायतों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

इस डील के पीछे का बड़ा मकसद बांग्लादेश में चीनी निवेश के बढ़ते प्रभाव को कम करना और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के नाम पर अपनी उपस्थिति को वैध बनाना माना जा रहा है।

टैरिफ का खेल: बांग्लादेश को क्या होगा फायदा?

बांग्लादेश लंबे समय से अमेरिका से अपने निर्यात (विशेषकर रेडीमेड गारमेंट्स) पर ड्यूटी-फ्री पहुंच की मांग कर रहा है।

आर्थिक बूस्ट: यदि यह समझौता होता है, तो बांग्लादेशी उत्पादों पर लगने वाले भारी टैरिफ में कटौती हो सकती है।

विदेशी मुद्रा भंडार: गिरते विदेशी मुद्रा भंडार को संभालने के लिए बांग्लादेश को अमेरिकी बाजार की सख्त जरूरत है।

भारत के लिए क्या है इसके मायने?

भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ही मजबूत व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन अमेरिका के साथ इस तरह की किसी भी 'विशेष डील' का असर भारत पर पड़ सकता है:

व्यापारिक प्रतिस्पर्धा: अमेरिकी बाजार में भारतीय और बांग्लादेशी टेक्सटाइल उत्पादों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

रणनीतिक चिंता: यदि अमेरिका इस डील के जरिए बांग्लादेश की राजनीति में सीधा हस्तक्षेप बढ़ाता है, तो यह भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के लिए एक नई चुनौती होगी।

सप्लाई चेन: भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाले ट्रांजिट और ट्रेड रूट समझौतों पर भी इसका परोक्ष असर देखने को मिल सकता है।

क्या यह सिर्फ व्यापार है या कुछ और?

विपक्षी दलों और कुछ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का आरोप है कि यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि चुनाव से पहले अमेरिका द्वारा बांग्लादेश की वर्तमान सत्ता को समर्थन देने का एक गुप्त रास्ता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर दोनों देशों ने इसे केवल आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक कदम बताया है।